नई दिल्ली : महीनों के तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बुधवार को एक MoU पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए। ये समझौता तुरंत लागू हो गया है। ट्रंप ने फ्रांस में वर्साय पैलेस में डिनर के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की मौजूदगी में इस हार्ड कॉपी पर साइन किया। व्हाइट हाउस ने इसका वीडियो भी जारी किया है। इस डील का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना और एनर्जी सप्लाई बहाल करना है।
दो तस्वीरों से पक्की हुई डील: वर्साय में साइन, स्विस समारोह रद्द
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप ने वर्साय पैलेस में मैक्रों के बगल बैठकर MoU पर दस्तखत किए। वहीं, साइन के बाद पेजेश्कियान की तस्वीर दुनिया के सामने आई। इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन किए थे। इस समझौते के बाद इस हफ्ते स्विट्जरलैंड में होने वाला औपचारिक समारोह रद्द कर दिया गया। व्हाइट हाउस ने डिनर टेबल पर साइन का वीडियो जारी कर डील की पुष्टि की।
अमेरिका-ईरान MoU की 14 बड़ी शर्तें: क्या-क्या बदलेगा
सैन्य टकराव खत्म: दोनों देश सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयां तुरंत और स्थाई रूप से खत्म करेंगे। एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
नाकेबंदी हटेगी: अमेरिका 30 दिनों में ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म करेगा। ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक वाणिज्यिक जहाजों को फ्री और सुरक्षित रास्ता देगा।
सैन्य वापसी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान के निकटवर्ती क्षेत्रों से अपनी सेना हटाएगा। क्षेत्र में नए सैनिक भी तैनात नहीं करेगा।
परमाणु डील: ईरान ने पुष्टि की कि वो परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार पर दोनों देश आपसी सहमति से फैसला करेंगे। ईरान शांतिपूर्ण परमाणु जरूरतों पर चर्चा को तैयार।
प्रतिबंध खत्म: अमेरिका ईरान पर लगे UN, IAEA और अपने सभी प्रतिबंध हटाएगा। फ्रीज संपत्तियां रिलीज की जाएंगी। ईरानी तेल निर्यात के लिए वित्त विभाग छूट देगा।
300 अरब डॉलर का पैकेज: अमेरिका और सहयोगी ईरान के पुनर्वास और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर की फंडिंग सुनिश्चित करेंगे। 60 दिनों में योजना का तरीका तय होगा।
60 दिन में फाइनल डील: दोनों देश 60 दिनों के भीतर बातचीत से अंतिम समझौता करेंगे। इसकी निगरानी के लिए एग्जिक्यूटिव मैकेनिज्म बनेगा। फाइनल डील को UNSC की मंजूरी मिलेगी।
3. डील का मकसद: होर्मुज खोलना और एनर्जी संकट टालना
व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस MoU का मकसद करीब 4 महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना है। साथ ही दुनिया के लिए एनर्जी सप्लाई का अहम रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलना है। होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल कीमतों पर असर पड़ रहा था। लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता का भी सम्मान करने पर सहमति बनी है।
