विश्व आलू कांग्रेस–2026 में उत्तर प्रदेश की सहभागिता से कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ:*नैरोबी, केन्या 31 अक्टूबर, 2026*केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित विश्व आलू कांग्रेस–2026 में उत्तर प्रदेश की सहभागिता के दौरान कृषि, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को नई दिशा मिली। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की कृषि क्षमता, आलू उत्पादन, उन्नत तकनीक, खाद्य प्रसंस्करण एवं निवेश अवसरों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद के अध्यक्ष एवं उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री बी.एल. मीणा जी का भारतीय उच्चायुक्त श्री आदर्श जी एवं उप उच्चायुक्त श्री सुशील प्रसाद जी के साथ आत्मीय स्वागत एवं संवाद हुआ।

बैठक में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के एशिया निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह तथा भारत में CIP के कंट्री मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधियों की सहभागिता रही।बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश एवं केन्या के मध्य कृषि, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव श्री बी.एल. मीणा जी द्वारा दोनों क्षेत्रों के खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को आपसी सहयोग से जोड़ने, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने के संबंध में प्रस्तुत अभिनव विचारों की विशेष सराहना की गई।भारतीय उच्चायुक्त ने उत्तर प्रदेश की कंपनियों एवं कृषि उद्यमियों को केन्या में भूमि पट्टे पर लेकर कृषि उत्पादन की संभावनाओं का अन्वेषण करने तथा उत्पादों को भारत निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस प्रकार की पहलों को सुगम बनाने हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन भी दिया। इससे प्रदेश के कृषि उद्यमियों एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के नए अवसर विकसित होने की संभावना है।

*उत्तर प्रदेश की कृषि एवं उद्यानिकी क्षमता का वैश्विक प्रदर्शन*

कांग्रेस के दौरान प्रस्तुत उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों के अनुसार, प्रदेश लगभग 250.66 लाख मीट्रिक टन आलू उत्पादन के साथ देश का अग्रणी आलू उत्पादक राज्य है। देश के कुल आलू उत्पादन में प्रदेश की लगभग 34 प्रतिशत हिस्सेदारी है। प्रदेश में लगभग 2.06 करोड़ मीट्रिक टन शीतगृह भंडारण क्षमता तथा व्यापक मंडी नेटवर्क आलू की आपूर्ति, विपणन एवं प्रसंस्करण उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।उत्तर प्रदेश लगभग 620.7 लाख मीट्रिक टन कुल उद्यानिकी उत्पादन एवं 26.06 लाख हेक्टेयर उद्यानिकी क्षेत्रफल के साथ देश के प्रमुख उद्यानिकी उत्पादक राज्यों में शामिल है। सब्जियों, फलों, मसालों एवं अन्य उद्यानिकी उत्पादों के व्यापक उत्पादन से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात की अपार संभावनाएं हैं।

*उन्नत तकनीक एवं मूल्य संवर्धन पर विशेष जोर*

कांग्रेस में आलू उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित वैश्विक तकनीकों, उन्नत बीज उत्पादन, रोगमुक्त रोपण सामग्री, फसल संरक्षण एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों पर अनुभवों का आदान-प्रदान हुआ।उत्तर प्रदेश में मेरठ एवं अन्य क्षेत्रों में टिश्यू कल्चर तथा एरोपोनिक्स आधारित रोगमुक्त आलू बीज उत्पादन की पहल प्रदेश की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है। इसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, उत्पादकता वृद्धि तथा किसानों को बेहतर रोपण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।प्रदेश में आलू भंडारण, प्रसंस्करण एवं विपणन को सुदृढ़ करने के लिए शीतगृह अवसंरचना, किसान हितैषी योजनाओं, डिजिटल पोर्टल एवं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की जा रही हैं। इन पहलों से किसानों को बाजार से जोड़ने तथा कृषि आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल रही है

*वैश्विक उद्योगों एवं संस्थानों के साथ सहभागिता

*विश्व आलू कांग्रेस–2026 में वैश्विक कृषि एवं आलू उद्योग से जुड़े प्रमुख संस्थानों, कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों की सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम के फील्ड डे पार्टनर्स, प्रदर्शकों एवं सहयोगी संस्थानों में Agrico, Agristo, Allied Potato, Bayer, Syngenta, Simplot, Meijer Potato, IPM Potato Group, HZPC, Kuku Foods, Tuberоsum Technologies, Koppert, Europlant तथा FIPS Africa सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थान शामिल रहे।इनकी सहभागिता आलू उत्पादन, उन्नत बीज तकनीक, फसल संरक्षण, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में वैश्विक नवाचारों को प्रदर्शित करती है।

*कृषि से खाद्य प्रसंस्करण एवं निर्यात तक*

उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता कृषि उत्पादों को केवल कच्चे माल तक सीमित न रखते हुए उनके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना तथा प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण का प्रमुख केंद्र बनाना है।प्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियां, औद्योगिक प्रोत्साहन, बेहतर कनेक्टिविटी, कृषि आधारित कच्चे माल की उपलब्धता तथा सुदृढ़ शीत श्रृंखला खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं।विश्व आलू कांग्रेस–2026 में उत्तर प्रदेश की सहभागिता तथा भारत–केन्या के मध्य हुई सार्थक चर्चा प्रदेश की कृषि क्षमता को वैश्विक बाजारों से जोड़ने, अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नए अवसर विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।यह सहभागिता उत्तर प्रदेश को कृषि उत्पादन से मूल्य संवर्धन, वैश्विक व्यापार एवं खाद्य प्रसंस्करण आधारित आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के राज्य सरकार के संकल्प को सशक्त करती है|

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