दिल्ली से लखनऊ तक सत्याग्रह पदयात्रा पूरी, पेपर लीक के खिलाफ इको गार्डन में आइसा के साथ संयुक्त प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ, 12 जुलाई 2026: दिल्ली से लखनऊ तक सत्याग्रह पदयात्रा पूरी करने के बाद युवा कार्यकर्ता लकी मौर्य और मनीष मौर्य ने रविवार को लखनऊ के इको गार्डन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के साथ संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। पदयात्रा और प्रदर्शन के माध्यम से पेपर लीक, प्रवेश एवं भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार, शिक्षा पर लगातार घटते सार्वजनिक खर्च और विद्यार्थियों तथा प्रतियोगी अभ्यर्थियों की पीड़ा के लिए जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई।यह सत्याग्रह पदयात्रा जंतर-मंतर, नई दिल्ली में आइसा कार्यकर्ताओं और अन्य आंदोलनकारियों द्वारा चलाए जा रहे अनिश्चितकालीन आंदोलन एवं भूख हड़ताल के समर्थन में भी आयोजित की गई।

जंतर-मंतर पर आंदोलनरत प्रदर्शनकारी पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार तथा विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक और आर्थिक दबाव के कारण हुई 20 से अधिक छात्रों की मौतों को संस्थानिक हत्याएं बताते हुए न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आइसा लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा, “पेपर लीक केवल तकनीकी विफलताएं या भ्रष्टाचार की अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं। ये उस गहरे राजनीतिक संकट का हिस्सा हैं, जिसमें सार्वजनिक शिक्षा को योजनाबद्ध ढंग से कमजोर किया जा रहा है, जबकि परीक्षाओं और कोचिंग को लगातार फैलते बाजार में बदल दिया गया है। सरकार विद्यार्थियों से कड़ी मेहनत करने, प्रतिस्पर्धा में बने रहने और धैर्य रखने की अपेक्षा करती है, लेकिन निष्पक्ष परीक्षा, समयबद्ध भर्ती और शिक्षा में पर्याप्त सार्वजनिक निवेश जैसी न्यूनतम शर्तों की गारंटी देने से भी पीछे हटती है।”उन्होंने कहा, “जब प्रश्नपत्र बेचे जाते हैं, रिक्त पद वर्षों तक खाली रहते हैं और भर्ती प्रक्रियाएं लंबे समय तक लटकाई जाती हैं, तब योग्यता और मेरिट की भाषा अर्थहीन हो जाती है। विद्यार्थियों की मौतों को निजी त्रासदी या व्यक्तिगत विफलता बताकर खारिज नहीं किया जा सकता।

इन्हें उस परीक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखना होगा, जो युवाओं के बीच असुरक्षा, कर्ज, अपमान और निराशा पैदा करती है। आइसा लकी मौर्य और मनीष मौर्य द्वारा की गई सत्याग्रह पदयात्रा तथा जंतर-मंतर पर चल रही भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन आंदोलन के साथ पूरी एकजुटता व्यक्त करता है।”आइसा उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष समर ने कहा, “उत्तर प्रदेश के लाखों विद्यार्थी वर्षों से परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक, रिक्त पदों और लंबी भर्ती प्रक्रियाओं का सामना कर रहे हैं। सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय परीक्षाओं को टालकर और भर्तियों को लटकाकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। लकी मौर्य और मनीष मौर्य की दिल्ली से लखनऊ तक की सत्याग्रह पदयात्रा विद्यार्थियों के इसी व्यापक आक्रोश की अभिव्यक्ति है। आइसा इस आंदोलन को प्रदेश के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और युवाओं के बीच आगे ले जाएगा- तथा निष्पक्ष परीक्षा और समयबद्ध रोजगार की लड़ाई को और मजबूत करेगा।”प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मनीष मौर्य ने कहा, “हमने दिल्ली से लखनऊ तक यह पदयात्रा इसलिए की, क्योंकि विद्यार्थियों के सामने खड़े इस संकट को कुछ दिनों की चर्चा के बाद भुला नहीं दिया जा सकता। प्रत्येक पेपर लीक के साथ वर्षों की मेहनत, परिवारों की जमा पूंजी और युवाओं के सपने नष्ट होते हैं। हमारी पदयात्रा का उद्देश्य इस आवाज को दिल्ली से बाहर ले जाना और यह स्पष्ट करना था कि परीक्षा व्यवस्था के बार-बार ध्वस्त होने की जिम्मेदारी सरकार को स्वीकार करनी होगी। पेपर लीक और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को दंडित करने के साथ-साथ राजनीतिक और संस्थागत जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।”लकी मौर्य ने कहा, “किसी परीक्षा की तैयारी करने वाला विद्यार्थी केवल अपना समय नहीं लगाता। उसके साथ पूरा परिवार त्याग करता है, कर्ज लेता है और इस उम्मीद में अपनी बुनियादी जरूरतों को टालता है कि शिक्षा उसे सुरक्षित भविष्य देगी। जब कोई परीक्षा रद्द होती है, वर्षों तक लटकती है या पेपर लीक के कारण उसकी विश्वसनीयता समाप्त हो जाती है, तो प्रशासन इसे एक सामान्य तकनीकी समस्या की तरह देखता है। प्रभावित विद्यार्थी के लिए इसका अर्थ कई वर्षों की मेहनत, आर्थिक संसाधनों और भविष्य की संभावनाओं का नष्ट हो जाना होता है। यह सत्याग्रह विद्यार्थियों के श्रम और जीवन का सम्मान किए जाने तथा पारदर्शी और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था की मांग है।”प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार के कुल बजट का 10 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया जाए, जिसमें 5 प्रतिशत केंद्र सरकार और 5 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करें। उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को समाप्त करने तथा शिक्षा और चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की स्थापना की मांग की।प्रमुख मांगों में वर्तमान केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और शिक्षा के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाए जाना भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि टीजीटी, पीजीटी और अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाएं प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाएं और भर्ती प्रक्रिया 6 महीने के भीतर पूरी की जाए। इसके साथ ही कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और प्राथमिक शिक्षकों को बीएलओ तथा चुनाव संबंधी कार्यों में लगाए जाने की व्यवस्था समाप्त करने की मांग की गई, ताकि वे पूरी तरह शिक्षण कार्य पर ध्यान दे सकें।प्रदर्शनकारियों ने पेपर लीक और उसके परिणामों के कारण आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए सामान्य अध्ययन का एक पारंपरिक प्रश्नपत्र तैयार करने और सीसैट परीक्षा में सभी अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।वक्ताओं ने कहा कि यह संकट किसी एक परीक्षा या पेपर लीक की किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। लगातार होने वाले पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी, शिक्षा का बाजारीकरण और सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर किए जाने की नीतियां मिलकर एक राष्ट्रीय संकट का निर्माण कर रही हैं, जिससे देश के करोड़ों विद्यार्थी और बेरोजगार युवा प्रभावित हो रहे हैं।प्रदर्शन के अंत में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और लोकतांत्रिक संगठनों से निष्पक्ष परीक्षाओं, पारदर्शी एवं समयबद्ध भर्ती, शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाने, पेपर लीक के लिए जवाबदेही तय करने और वर्तमान व्यवस्था के कारण अपने जीवन और भविष्य को खो चुके विद्यार्थियों के लिए न्याय की मांग पर एकजुट होने का आह्वान किया गया।*जारीकर्ता:*ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, लखनऊ विश्वविद्यालय

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