नई दिल्ली: अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में ‘सेंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ पास होने के बाद भारत ने वाशिंगटन को कड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि देश के 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत किसी भी बाहरी दबाव में आए बिना बाजार की स्थितियों के अनुसार विभिन्न देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखेगा| अमेरिकी विधेयक और भारत का रुख 16 सितंबर 2026 को पारित इस अमेरिकी विधेयक में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत सरकार इस विधेयक के हर पहलू का बारीकी से अध्ययन कर रही है और संभावित वित्तीय असर से निपटने के लिए घरेलू उद्योगों और निर्यातकों के साथ मिलकर एक बैकअप प्लान तैयार कर रही है। द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक बाजार पर असर विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई दौर की सीधी बातचीत हुई है। भारत ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ऐसे एकतरफा आर्थिक फैसलों से: दोनों देशों के द्विपक्षीय और व्यापारिक संबंधों में दरार आ सकती है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारी अस्थिरता पैदा हो सकती है। भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी और अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगी
