नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस’ (IMC) के 10वें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा कि बीते एक दशक में मोबाइल फोन केवल संचार का साधन न रहकर ‘सुशासन’ (Good Governance) का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिजिटल तकनीक ने देश के आम नागरिकों की जीवनशैली (Ease of Living) में अभूतपूर्व सुधार किया है।
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से रुकी लीकेज
प्रधानमंत्री ने डिजिटल गवर्नेंस की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि:
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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से लगभग ₹50 लाख करोड़ की राशि सीधे देश के गरीबों और लाभार्थियों के बैंक खातों में बिना किसी बिचौलिए के भेजी गई है।
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इस पारदर्शी व्यवस्था के कारण करीब ₹5 लाख करोड़ की सरकारी राशि गलत हाथों में जाने और लीकेज होने से बचाई गई।
डिजिटल डिवाइड समाप्त करने पर बल
पीएम मोदी ने कहा कि एक दशक पहले तक आधुनिक तकनीक और इंटरनेट एक प्रिविलेज (विशेषाधिकार) माना जाता था। डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए सरकार ने इसका ‘लोकतंत्रीकरण’ (Democratisation) किया, जिससे आज दूर-दराज के गांवों और छोटे शहरों के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
गेमिंग और कंटेंट क्रिएशन में क्रांति
मोबाइल फोन की बदलती भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा:
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आज भारत में 50 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स से जुड़े हैं, जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं की बड़ी भागीदारी है।
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भारत अब केवल कंटेंट कंज्यूम (देखने) करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि भारतीय युवा मोबाइल के जरिए कंटेंट और गेमिंग बिजनेस खड़े कर क्रिएटर बन रहे हैं।
साइबर सुरक्षा और डीपफेक पर वैश्विक ढांचे की मांग
बढ़ते डिजिटल नेटवर्क के साथ सुरक्षा चिंताओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने डीपफेक (Deepfake) को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि फोन और नेटवर्क सुरक्षा बेहद जरूरी है और इसके लिए एक सर्वमान्य ‘ग्लोबल फ्रेमवर्क’ (वैश्विक नियम व ढांचा) तैयार करने पर मिलकर काम करना होगा।
