आजादी का मतलब ‘मनमर्जी’ नहीं: NSA अजित डोभाल ने Gen-Z को दिया राष्ट्र निर्माण का नया मंत्र

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

पुणे : लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर आयोजित एक भव्य समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने देश की नई पीढ़ी (Gen-Z) को राष्ट्रहित और जिम्मेदार नागरिकता का बड़ा संदेश दिया।

‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से सम्मानित

पुणे में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने NSA अजित डोभाल को प्रतिष्ठित ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026’ से नवाजा। सम्मान स्वरूप उन्हें पारंपरिक पुणेरी पगड़ी, स्मृति चिह्न, चेक और तिलक जी द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ‘गीता रहस्य’ की प्रति भेंट की गई।

आजादी का सही अर्थ समझना बेहद जरूरी
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ जानना चाहिए। उन्होंने कहा:

“कुछ लोग मान लेते हैं कि आजादी का मतलब मनमर्जी या अपनी इच्छा से कुछ भी करना है, लेकिन यह सोच पूरी तरह गलत है। आजादी का असली अर्थ जिम्मेदारी है। जो रास्ता राष्ट्रहित के खिलाफ जाता हो, उस पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।”

मजबूत नेतृत्व में विरोधी ताकतों को जवाब
देश की सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए NSA डोभाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत इस समय आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की चुनौतियों से सफलता के साथ निपट रहा है। देश की तेज तरक्की से कई विरोधी ताकतें परेशान हैं, ऐसे दौर में हर नागरिक का पहला कर्तव्य भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाना है।

लोकमान्य तिलक के जीवन से सीख लेने की अपील
डोभाल ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के दौरान पुणे में ही तिलक जी के विचारों को जाना था। अंग्रेजों के कठोर शासन में भी तिलक जी ने निडर होकर आवाज उठाई थी। युवाओं को उनके संघर्षों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।

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