अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को बेनकाब करने के लिए भारत ने पूरी कूटनीतिक रणनीति तैयार कर ली है। पेरिस में आयोजित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पूर्ण बैठक में भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकी मसूद अजहर के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। इस दौरान भारत के पास तालिबान का वह बयान सबसे बड़ा हथियार बना, जिसने इस्लामाबाद के दावों की पोल खोल दी थी।
मुख्य बातें:
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तालिबान के बयान से उजागर हुआ पाकिस्तान का झूठ: पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता आ रहा है कि मसूद अजहर 2019 से अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जिया अहमद थाकल ने पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि अजहर अफगानिस्तान की सीमा में मौजूद नहीं है। तालिबान ने यह भी उजागर किया कि इस्लामाबाद की ओर से उसकी मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक दस्तावेज या सूचना साझा नहीं की गई थी।
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भारत का कड़ा रुख और कूटनीतिक दबाव: भारत इसी विरोधाभास को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ढाल बनाकर पेश कर रहा है। नई दिल्ली का सीधा तर्क है कि पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर पनाह पा रहे आतंकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने के बजाय केवल दिखावटी कार्रवाई और बयानोंबाजी कर रहा है। बैठक से पहले भारत ने सहयोगी देशों के राजनयिकों और FATF के प्रमुख सदस्यों के सामने पाकिस्तान के इस दोहरे रवैये के सबूत रखे।
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FATF की निगरानी और टेरर फंडिंग का मुद्दा: फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) वैश्विक स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली प्रमुख संस्था है। हालांकि पाकिस्तान पहले इस संस्था की ‘ग्रे लिस्ट’ से बाहर आ चुका है, लेकिन एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। भारत का यह सख्त रुख वैश्विक वित्तीय सुरक्षा और आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम कसने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
