रकाबगंज के खजुहा चौराहे पर गूंजे ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे, हवन-भंडारे के साथ हुआ गणेश महोत्सव का समापन

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ। पुराने लखनऊ के रकाबगंज क्षेत्र स्थित खजुहा चौराहा रविवार को गणपति बप्पा मोरया के जयघोष से गूंज उठा। जय माता दी मंदिर खजुहा सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्री गणेश महाउत्सव का विधि-विधान के साथ समापन हुआ।

समिति द्वारा 14 सितंबर को श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई थी। स्थापना के बाद से लगातार सात दिनों तक पूजा-अर्चना, आरती, भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। महोत्सव के समापन दिवस 20 सितंबर को हवन पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

विसर्जन से पूर्व पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण के साथ हवन कराया। यजमानों ने हवन कुंड में आहुति देकर भगवान श्री गणेश की आराधना की और परिवार, समाज व देश में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की।

हवन के पश्चात समिति की ओर से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, राहगीरों और स्थानीय लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। समिति के कार्यकर्ताओं ने सेवा भाव से छोला-चावल, पूड़ी-सब्जी का प्रसाद वितरित किया।

भंडारे के उपरांत मन्नतों के राजा की भव्य विसर्जन शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। प्रतिमा का रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक श्रृंगार कर रथ पर विराजमान किया गया। ढोल-नगाड़ों की थाप और ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना’, ‘एक दो तीन चार, गणपति की जय जयकार’ के जयघोष, अबीर-गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच भक्त झूमते-नाचते चल रहे थे।

शोभायात्रा खजुहा चौराहे से प्रारंभ होकर शास्त्री नगर, रकाबगंज चौराहा, सुभाष मार्ग, मेडिकल कॉलेज चौराहा और चौक चौराहा होते हुए कुड़िया घाट पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया।

इस अवसर पर समिति के प्रमुख सेवक अशोक कुमार प्रजापति, कोषाध्यक्ष लालता प्रसाद तिवारी, महामंत्री एवं मीडिया प्रभारी जितेश श्रीवास्तव, सुधीर गुप्ता, जितेन्द्र शर्मा, जितेन्द्र प्रजापति, महिंदर, दिलीप शर्मा, महिला समिति की मालती प्रजापति, सुनीता प्रजापति, राजेश्वरी,रेनू सहित बड़ी संख्या में समिति के पदाधिकारी और श्रद्धालु मौजूद रहे।

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा, सेवा और सद्भाव की भावना को मजबूत करना है।

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