13 सितंबर 2026 लखनऊ। गोमती पुस्तक महोत्सव के तीसरे सत्र में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के साथ ‘अनुभव, विचार और संवाद’ विषय पर विशेष संवाद आयोजित किया गया। इस सत्र का समन्वय चंद्रशेखर वर्मा ने किया। संवाद के दौरान प्रशासनिक दायित्वों के साथ साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में सक्रिय श्री सेन शर्मा के रचनात्मक व्यक्तित्व, साहित्यिक यात्रा और जीवन से जुड़े अनुभवों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की साहित्यिक रुचि और लेखन ने संवाद को विशेष आयाम प्रदान किया। इस दौरान उनकी चर्चित पुस्तकों ‘लव इन लखनऊ’, ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’, ‘लव साइड बाय साइड’, ‘द विकसित भारत क्विज’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘मुसाफिर हूँ यारो’, ‘लखनऊ डायरीज’ तथा ‘एक कदम हजार अफसाने’ पर चर्चा हुई। उन्होंने अपनी रचनाओं की पृष्ठभूमि, लेखन के अनुभव, साहित्य के प्रति अपने दृष्टिकोण तथा जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंग श्रोताओं के साथ साझा किए।
लखनऊ के संदर्भ में अपर मुख्य सचिव शर्मा ने कहा कि लखनऊ अपने भीतर कई सदियों के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक बदलावों को समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि लगभग बीस वर्ष पहले का लखनऊ, उसका रहन-सहन और सामाजिक परिवेश आज के लखनऊ से काफी अलग है। उन्होंने भविष्य में लखनऊ को केंद्र में रखकर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की अपनी इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित रचना वर्ष 1916 से 2026 तक की समयावधि को केंद्र में रखकर तैयार करने की उनकी योजना है।

अपनी पुस्तक ‘लव इन लखनऊ’ के संदर्भ में अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि इस पुस्तक की रचना आज के बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई युवा प्रेम संबंधों में असफलता या धोखा मिलने के बाद आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं। ऐसे में साहित्य युवाओं को भावनात्मक रूप से संभालने, परिस्थितियों को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’ पर भी विस्तार से चर्चा की तथा अंडमान-निकोबार से जुड़े अपने अनेक रोचक अनुभव और प्रसंग श्रोताओं के साथ साझा किए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर विचार व्यक्त करते हुए अपर मुख्य सचिव शर्मा ने कहा कि एआई हमेशा हमारी बातों और भावनाओं को उसी रूप में प्रस्तुत नहीं करता, जिस रूप में हम उन्हें व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अपने साहित्य और समाज को सही ढंग से समझने के लिए हमें अपनी भाषाओं को स्वयं विकसित और समृद्ध करना होगा। भाषा की मौलिकता, संवेदनशीलता और साहित्यिक अभिव्यक्ति को बनाए रखना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
संवाद के दौरान समन्वयक चंद्रशेखर वर्मा के सहज और सारगर्भित प्रश्नों ने कार्यक्रम को रोचक एवं सार्थक दिशा प्रदान की। अनुभव, साहित्य, विचार और समकालीन विषयों के समन्वय से हुए इस विशेष संवाद ने श्रोताओं को अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के प्रशासनिक व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके रचनात्मक, साहित्यिक और संवेदनशील पक्ष से भी परिचित कराया।
