लखनऊ, 03 नवम्बर 2026।जय नारायण मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय (केकेसी), लखनऊ में आयोजित 24वीं वार्षिक अंतर महाविद्यालयी युवा सांस्कृतिक प्रतियोगिता ‘दिव्यांकुर-2026’ का समापन मंगलवार को हुआ। चार दिवसीय इस सांस्कृतिक महाकुंभ के समापन समारोह में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता कर विभिन्न स्पर्धाओं के विजयी छात्र-छात्राओं को पदक, प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार वितरित किए। समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष गोपाल नारायण मिश्र ने की तथा सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि संस्कार और कौशल से समृद्ध युवा शक्ति ही एक प्रबुद्ध, समर्थ और आदर्श समाज का निर्माण करती है, जो राष्ट्रहित में अपना सर्वोत्तम योगदान देता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में ऐसे अनेक व्यावहारिक व नवाचारी प्रावधान समाहित किए गए हैं, जो राष्ट्र और समाज के दीर्घकालिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण तथा युवाओं के सर्वांगीण उन्नयन को पोषित करते हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं को किसी न किसी कला विधा से अवश्य जोड़ें, क्योंकि कला व्यक्ति को पशुता से मानवता की ओर ले जाकर एक सभ्य एवं संवेदनशील समाज की रचना में सहायता करती है। उन्होंने कहा कि संस्कारविहीन युवा दिशाहीन हो जाते हैं, जबकि सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को रेखांकित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि लगभग सैकड़ों वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं के निरंतर आक्रमणों के बावजूद हमारी सांस्कृतिक पहचान, जीवन मूल्य और मूल संस्कार कभी नष्ट नहीं हुए। हमारी सांस्कृतिक विरासत की जड़ें इतनी गहरी हैं कि तमाम प्रतिकूल प्रहारों को झेलकर भी भारतीय संस्कृति आज पूरे विश्व में फल-फूल रही है। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी समृद्ध संस्कृति, राष्ट्र और समाज पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने ज्ञान, विज्ञान, कला और कौशल के क्षेत्र में वैश्विक पटल पर भारत का परचम लहराने वाले देश के युवाओं की प्रतिभा की मुक्तकंठ से सराहना की।समापन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित इतिहासकार एवं अभिनेता डॉ. रवि भट्ट ने महाविद्यालय के पूर्व छात्र के रूप में अपने संस्मरण साझा करते हुए छात्र-छात्राओं को भाषा, व्याकरण और संवाद कुशलता में पारंगत होने की सीख दी। वहीं उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक प्रो. बी.एल. शर्मा ने विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला से अवगत कराते हुए कहा कि उच्च शिक्षा के लिए अधिक से अधिक युवाओं को महाविद्यालयों तक पहुंचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। महाविद्यालय की सांस्कृतिक समिति की संयोजक प्रो. अलका शर्मा ने चार दिवसीय गतिविधियों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रतिकूल मौसम के बावजूद 20 से अधिक विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने 22 विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में पूरे उत्साह से भाग लिया। आरंभ में प्राचार्य प्रो. के.के. शुक्ल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा प्रो. वंदना सिंह ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विजय राज श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर लुआक्टा अध्यक्ष प्रो. मनोज पांडेय सहित महाविद्यालय के शिक्षक, सांस्कृतिक समिति के सदस्य एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
