नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने गोवा स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘वेलकम’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपने दमदार अभिनय और बेबाक संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीतने वाले नाना पाटेकर के जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है।
कैसे हुआ निधन?
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, अभिनेता को अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। उनके गोवा वाले फ्लैट पर ही डॉक्टरों ने तुरंत कार्डियक मसाज (CPR) देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन हालत में सुधार न होने पर उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका और सुबह 5:20 बजे उनका निधन हो गया।
संघर्षों से भरा रहा शुरुआती सफर
1 जनवरी 1951 को मुंबई में जन्मे नाना पाटेकर का शुरुआती जीवन काफी कठिन और आर्थिक तंगी से भरा रहा। पारिवारिक व्यवसाय बंद हो जाने के कारण उन्होंने कम उम्र में ही परिवार का सहारा बनने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग और फिल्मों के पोस्टर तक पेंट किए। अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और असाधारण अभिनय क्षमता के दम पर उन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक अलग और अमिट पहचान बनाई।
निजी जीवन और संपत्ति
लगभग चार दशकों से अधिक लंबे फिल्मी करियर में अपनी सादगी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर अपने पीछे पत्नी नीलकंती पाटेकर और बेटे मल्हार पाटेकर को छोड़ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 80 करोड़ रुपये आंकी गई है। उनके पास मुंबई में एक 1 BHK फ्लैट, पुणे में एक मकान और गोवा में फ्लैट के अलावा पुणे के खड़कवासला में 27 एकड़ का फार्महाउस भी था, जहां वे अक्सर खेती करते हुए अपना समय बिताते थे।
असल जिंदगी में ‘किसानों के मसीहा’
नाना पाटेकर सिर्फ परदे पर ही नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी एक जननायक थे। किसानों की समस्याओं और दुर्दशा से द्रवित होकर उन्होंने वर्ष 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ (NAAM Foundation) नामक एनजीओ की शुरुआत की थी। इस संस्था के माध्यम से वे सूखाग्रस्त किसानों, उनके परिवारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद करते थे। समाज के प्रति उनका यह योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।
