प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): पद्मा एकादशी के पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। तड़के से ही देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने पवित्र संगम में आस्था की डुबकी लगाई और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
पद्मा एकादशी का धार्मिक महत्व
भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी (परिवर्तिनी एकादशी) के नाम से जाना जाता है।
भगवान वामन की पूजा: इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की विशेष पूजा की जाती है।
करवट बदलने की मान्यता: चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं। मान्यता है कि पद्मा एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु करवट बदलते हैं, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
मंगलवार का शुभ संयोग: इस बार एकादशी के साथ मंगलवार का दिन होने से हनुमान जी की उपासना का भी विशेष फल प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा, इसी दिन से कई श्रद्धालुओं की गया (पितृपक्ष) यात्रा का भी शुभारंभ हो रहा है।
स्नान और दान से अनंत पुण्य की प्राप्ति
तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं के अनुसार, प्रयागराज के संगम तट पर पद्मा एकादशी के दिन स्नान, ध्यान, पूजा-अनुष्ठान और पिंडदान करने से अनंत गुना पुण्य प्राप्त होता है। गंगा स्नान से न केवल मन शुद्ध और भावनाएं पवित्र होती हैं, बल्कि परिवार में धन-धान्य और सुख-शांति का वास होता है।
