नई दिल्ली: भारत के वरिष्ठ वकील और पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने देश में चल रहे कुछ विरोध-प्रदर्शनों को लेकर एक सनसनीखेज बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि देश की व्यवस्था को अस्थिर करने और भारत की विकास गति को रोकने के लिए विदेशी फंडिंग और बाहरी ताकतों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
🌐 बाहरी दखल और फंडिंग पर गंभीर आरोप
एक साक्षात्कार के दौरान हरीश साल्वे ने कहा कि उन्हें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि भारत में आयोजित होने वाले कुछ प्रदर्शनों को विदेशों से बढ़ावा और वित्तीय सहायता मिल रही है।
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फंडिंग का स्रोत: साल्वे ने सवाल उठाया कि विरोध-प्रदर्शनों को आयोजित करने और सोशल मीडिया पर एक खास नैरेटिव सेट करने के लिए भारी मात्रा में पैसा खर्च होता है, आखिर यह फंडिंग कहां से आ रही है? उन्होंने कुछ यूट्यूबर्स और विदेशी जमीन (जैसे जर्मनी या अन्य देशों) से सक्रिय लोगों का जिक्र करते हुए उनके वित्तीय स्रोतों की जांच की मांग की।
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अमेरिका और अन्य देशों की भूमिका: उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेशी देश, विशेषकर अमेरिका, भारत की प्रगति से पूरी तरह खुश नहीं हैं और पड़ोसी देशों (जैसे नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश) में हालिया घटनाक्रम भी बाहरी हस्तक्षेप के एक बड़े पैटर्न की ओर इशारा करते हैं।
⚖️ जन आंदोलन नहीं, बल्कि प्रायोजित विरोध
हरीश साल्वे का मानना है कि वर्तमान में दिखाई दे रहे कुछ प्रदर्शन वास्तविक जन आंदोलन (पब्लिक अप्राइजिंग) नहीं हैं, बल्कि ये सुनियोजित तरीके से खड़े किए गए प्रयास हैं।
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सोशल मीडिया नैरेटिव: उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया रील्स, वीडियो और छोटे संदेशों के जरिए झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं और जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
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सरकार से जांच की अपील: पूर्व सॉलिसिटर जनरल ने सरकार से आग्रह किया कि संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा के लिए ऐसी गतिविधियों और विदेशी फंडिंग से चलने वाले आंदोलनों के खिलाफ कड़ी और ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के कृत्रिम आंदोलन लंबे समय तक नहीं टिक पाएंगे क्योंकि देश की जनता पूरी स्थिति को भली-भांति समझती है।
