सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत बिना पक्ष सुने या केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर एकतरफा (ex-parte) अंतरिम आदेश जारी नहीं कर सकती।
खबर के मुख्य बिंदु:
-
अंतरिम राहत से इनकार: अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने जैसा कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से पहले संबंधित पक्षों का रुख जानना अनिवार्य है।
-
केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस: शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार (कानून मंत्रालय), निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी) को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
-
एकतरफा फैसले लेने के आरोप: याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह और मेनका गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति या बहुमत के बिना एकतरफा निर्णय ले रहे हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव और संस्था की साख प्रभावित हो रही है। इसके अलावा, विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में खामियों और फॉर्म-6 में बदलावों पर भी सवाल उठाए गए।
-
तथ्यों की जांच के बाद होगी आगे की सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले आयोग के जवाब की समीक्षा करेगा कि निर्णय किस तरह लिए गए थे। यदि रिकॉर्ड में यह पाया जाता है कि वैधानिक प्रावधानों या बहुमत की व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है, तो उन फैसलों पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
