नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल और घास’ को फ्रीज करने के चुनाव आयोग (ECI) के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने ममता बनर्जी गुट द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्वाचन आयोग से पूछा है कि वह पार्टी विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर तय की है।
सुनवाई के मुख्य बिंदु
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कपिल सिब्बल की दलील: ममता बनर्जी गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि उप-चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद बीच प्रक्रिया में आयोग द्वारा पार्टी का नाम और सिंबल फ्रीज करना अनुचित है। यह हमारी पहचान और अस्तित्व का सवाल है, इसलिए कोर्ट को इसमें तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि चूंकि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसे में इस समस्या का व्यावहारिक समाधान यही है कि चुनाव आयोग मामले की सुनवाई कर जल्द से जल्द कोई अंतिम निर्णय ले।
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आयोग से समय-सीमा मांगी: शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा है कि वह दोनों गुटों के बीच जारी विवाद को निपटाने में कितना समय लेगा और 28 सितंबर तक इस संबंध में अपनी रिपोर्ट या जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा विवाद?
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आयोग का अंतरिम आदेश: पार्टी में आंतरिक गुटबाजी के बाद चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को एक अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक सिंबल ‘फूल और घास’ का इस्तेमाल करने से रोक दिया था।
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उप-चुनाव के लिए नए नाम व सिंबल: आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनावों (नंदीग्राम और रेजीनगर) को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दोनों पक्षों को अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए:
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ममता बनर्जी गुट: ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ — चुनाव चिह्न: फुटबॉल खिलाड़ी
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बागी गुट (ऋतब्रत बनर्जी/अरूप रॉय): ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ — चुनाव चिह्न: लिफाफा
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ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के इस अंतरिम फैसले को असंवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अब 28 सितंबर को आगे की सुनवाई होगी।
