मुंबई: बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी इन दिनों अपनी फिल्म ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ को लेकर सुर्खियों में हैं। इस साल की शुरुआत में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल से अपनी यात्रा शुरू करने वाली उनकी यह बतौर प्रोड्यूसर पहली फीचर फिल्म अब प्रतिष्ठित टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) तक पहुंच चुकी है। इस शानदार सफलता के बीच श्वेता ने साझा किया है कि एक निर्माता (प्रोड्यूसर) की भूमिका निभाने के बाद कहानी कहने (स्टोरीटेलिंग) को लेकर उनका दृष्टिकोण काफी बदल गया है।
बतौर प्रोड्यूसर बदल गया कहानी को देखने का नजरिया
श्वेता का कहना है कि अब वह फिल्म निर्माण की प्रक्रिया तक ही सीमित नहीं रहतीं, बल्कि यह भी सोचती हैं कि फिल्म किन दर्शकों तक पहुंचेगी और इसके जरिए समाज में किस तरह की सार्थक बातचीत शुरू हो सकती है।
उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा, “जिस फिल्म पर आप पूरी तरह भरोसा करते हैं, उसे किसी अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाना एक बेहद खास अहसास होता है। बर्लिन से टोरंटो तक का यह सफर मेरे लिए अद्भुत रहा है, क्योंकि इसने मुझे इस फिल्म को एक बिल्कुल नए और व्यापक नजरिए से पेश करने का मौका दिया।”
उन्होंने आगे कहा, “एक अभिनेता के तौर पर आप केवल अपने किरदार और कहानी को पर्दे पर जीवंत करने में जुटे रहते हैं। लेकिन एक प्रोड्यूसर के रूप में आपको यह भी देखना होता है कि फिल्म बनने के बाद उसका सफर कैसा होगा, कौन से लोग इससे जुड़ेंगे और आप इसे सही दर्शकों तक कैसे पहुंचा सकते हैं। यह मेरे लिए सीखने का एक शानदार सफर रहा है।”
फिल्म और इसके खास पहलू
नेशनल अवॉर्ड विजेता फिल्ममेकर संजय नाग के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मुझे जान ना कहो मेरी जान’ में तिलोत्तमा शोम और श्वेता त्रिपाठी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगी। यह एक संवेदनशील क्वीर लव स्टोरी (Queer Love Story) है, जिसमें प्यार और मानवीय रिश्तों को बेहद ईमानदारी और गहराई के साथ पर्दे पर उतारा गया है।
गौरतलब है कि श्वेता का बतौर प्रोड्यूसर यह सफर बहुत पहले थिएटर से शुरू हुआ था। साल 2010 में उन्होंने अपनी थिएटर प्रोडक्शन कंपनी ‘ऑलमाइटी’ की शुरुआत की थी, जिसके तहत उन्होंने कई बेहतरीन नाटक भी प्रस्तुत किए हैं।
