भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना है। यदि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में इजाफा करता है, तो बैंकों के लिए कर्ज जुटाने की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा और फ्लोटिंग ब्याज दरों पर लिए गए होम लोन, पर्सनल लोन और कार लोन महंगे हो जाएंगे, जिससे हर महीने की किस्त (EMI) बढ़ सकती है।
रेपो रेट क्या है और इसका असर कैसे पड़ता है?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI इसमें बढ़ोतरी करता है, तो बैंक अपने फंड की बढ़ी हुई लागत का भार ग्राहकों पर डाल देते हैं। लोन की ब्याज दरें बढ़ने से EMI बढ़ जाती है या फिर लोन चुकाने की समय-अवधि (Tenure) लंबी हो जाती है।
लोन की रकम के हिसाब से कितना बढ़ सकता है EMI का बोझ?
यदि ब्याज दर में 0.50% की बढ़ोतरी होती है (उदाहरण के तौर पर 8.5% से बढ़कर 9.0% होने पर, 20 साल की अवधि के लिए):
-
₹10 लाख का लोन: किस्त ₹8,678 से बढ़कर ₹8,997 हो जाएगी। (हर महीने ₹319 और साल में ₹3,828 का अतिरिक्त बोझ)
-
₹20 लाख का लोन: किस्त ₹17,356 से बढ़कर ₹17,995 हो जाएगी। (हर महीने ₹638 और साल में ₹7,656 ज्यादा)
-
₹30 लाख का लोन: किस्त ₹26,035 से बढ़कर ₹26,992 हो जाएगी। (हर महीने ₹957 और साल में ₹11,484 अतिरिक्त)
-
₹40 लाख का लोन: किस्त ₹34,713 से बढ़कर ₹35,989 हो जाएगी। (हर महीने ₹1,276 और साल में ₹15,312 ज्यादा)
-
₹50 लाख का लोन: किस्त ₹43,391 से बढ़कर ₹44,986 हो जाएगी। (हर महीने ₹1,595 और साल में लगभग ₹19,140 का अतिरिक्त खर्च)
पर्सनल लोन पर असर
पर्सनल लोन सिक्योर्ड लोन की तुलना में पहले से ही महंगे होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि 5 साल के लिए ₹5 लाख का पर्सनल लोन 12% ब्याज दर पर है और यह बढ़कर 12.5% हो जाता है, तो महीने की किस्त ₹11,122 से बढ़कर ₹11,249 हो जाएगी (हर महीने ₹127 का अंतर)।
ग्राहकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
-
EMI बनाम लोन की अवधि: बैंक आमतौर पर किस्त की रकम तुरंत बढ़ाने के बजाय लोन चुकाने की समय-अवधि (Tenure) बढ़ा देते हैं। ग्राहक अपने बैंक से संपर्क कर यह तय कर सकते हैं कि वे EMI बढ़ाना चाहते हैं या अवधि।
-
प्री-पेमेंट विकल्प: अगर संभव हो, तो हर साल लोन की थोड़ी राशि का प्री-पेमेंट (Partial Prepayment) करके अतिरिक्त ब्याज के बोझ को कम किया जा सकता है।
