बिलकिस बानो केस: प्रह्लाद जोशी के बयान पर राहुल और प्रियंका गांधी का तीखा हमला

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नई दिल्ली : बिलकिस बानो केस में दोषियों की रिहाई पर दिए गए पुराने बयान को लेकर केंद्र के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी विपक्ष के निशाने पर हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दोनों ने संसद से लेकर बाहर तक सरकार और PM नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है।

राहुल गांधी: ‘सबसे गंदे किस्म का आदमी’
संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा,
“इतने सारे युवा एजुकेशन सिस्टम को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और कई लड़कियां प्रदर्शन कर रही हैं। उन्हें पीटा गया। बीजेपी ने एक ऐसे व्यक्ति को बैठाया है जो बलात्कारियों का रक्षक है? वो सबसे गंदे किस्म का आदमी है।”

राहुल ने आगे कहा, “ऐसे व्यक्ति से ज्यादा गंदा कोई नहीं हो सकता जो ये कहे कि बलात्कारियों को सुरक्षा की जरूरत है। ये भारत का शिक्षा मंत्री है। ये अजीब है। PM की तरफ से ये एक अजीब प्रतिक्रिया है कि उनके मंत्रिमंडल में इतने लोग हैं। वो उनमें से किसी को भी चुन सकते थे, लेकिन उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो बलात्कारियों को संरक्षण देता है। ये काफी हैरान करने वाला है।”

प्रियंका गांधी: ‘देश की लड़कियों को क्या संदेश’
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सदन में मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा,”प्रधानमंत्री ने नया शिक्षा मंत्री चुना, ऐसे व्यक्ति को सत्ता पर आसीन किया जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई को अपनी सहमति दी थी। देश की करोड़ों लड़कियों को प्रधानमंत्री ने क्या संदेश दिया?”एक्ज़िक्यूटिव ब्रांच

प्रह्लाद जोशी का जवाब: ‘आरोपों का खंडन’
विपक्ष के हमले पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “प्रियंका जी को अपने बयानों को सही साबित करना चाहिए था। जो गलत जानकारी फैलाई जा रही है, उसके बारे में कार्रवाई होनी चाहिए। क्या कोई कुछ भी कहकर बच सकता है? मैं इन आरोपों का खंडन करता हूं। उन्हें पार्टी से निकाल देना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।”

बिलकिस बानो केस में दोषियों की रिहाई के समय जोशी ने कहा था, “मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता, क्योंकि ये कानून की एक प्रक्रिया है।” उन्होंने तर्क दिया था कि जेल में काफी समय बिताने वाले दोषियों की रिहाई के लिए कानून में प्रावधान मौजूद हैं।

पृष्ठभूमि
NEET पेपर लीक के विरोध के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। 25 जुलाई को उनके इस्तीफे के बाद सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा है।

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