संयुक्त राष्ट्र: भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह पक्षपातपूर्ण करार दिया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आतंकवाद की गंभीरता और उसके पीड़ितों के अधिकारों को नजरअंदाज कर राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी रिपोर्ट तैयार नहीं की जानी चाहिए। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र मंच से भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो देश अपने यहां अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर सकता, उसे भारत को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पर भारत की कड़ी आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति की बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने धार्मिक या आस्था की स्वतंत्रता पर विशेष दूत नजीला घनेया की रिपोर्ट पर भारत का पक्ष रखा। इस रिपोर्ट में भारत में दफनाने से जुड़े मामलों और कुछ सुरक्षा अभियानों का जिक्र किया गया था।
भारतीय प्रतिनिधि ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “लोगों के दर्द और नुकसान से राजनीतिक फायदा उठाना ऐसा विषय नहीं होना चाहिए, जिसके आधार पर विशेष दूत अपनी रिपोर्ट तैयार करें। यह बेहद हैरानी की बात है कि आतंकवादियों के अधिकारों की तो जोरदार वकालत की जाती है, लेकिन आतंकवाद के निर्दोष पीड़ितों के प्रति वैसी चिंता नहीं दिखाई जाती।”
भारत ने यह भी सवाल उठाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान दफनाने से जुड़ी कथित समस्याओं और भेदभाव का जिक्र केवल ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) के संदर्भ में ही क्यों किया गया, जबकि विकसित देशों की ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने उदाहरण दिया कि न्यूयॉर्क शहर में महामारी के दौरान हजारों मृतकों को एक अलग द्वीप पर सामूहिक कब्रों में दफनाया गया था, जिसका रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है।
पाकिस्तान को दो टूक जवाब
बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा उठाए गए बेतुके सवालों और आरोपों का कड़ा जवाब दिया। भाविका मंगलानंदन ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जो देश 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान अपने ही मृत सैनिकों के शव तक स्वीकार करने से पीछे हट गया था, वह आज धर्म, धार्मिक स्वतंत्रता और अंतिम संस्कार के अधिकारों पर उपदेश दे रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय सेना ने कई पाकिस्तानी सैनिकों के शवों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया था।
भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह भारत पर अनावश्यक टिप्पणियां करने के बजाय अपने कब्जे वाले कश्मीर (PoE) और अपने देश के भीतर सिमट रहे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर ध्यान दे, जहाँ उनके साथ लगातार दुर्व्यवहार की घटनाएं होती हैं।
