दया नहीं, समान अवसर चाहिए! दिव्यांगजनों के अधिकारों पर लखनऊ में जोरदार चर्चा

उत्तर प्रदेश राज्य लखनऊ शहर

लखनऊ। दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पायसम लखनऊ एवं विमला इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का विषय “दिव्यांगजनों हेतु समावेशी शिक्षा की आवश्यकता, महत्व तथा उसमें आने वाली बाधाएं” रहा।
पायसम सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यशाला में विशेष शिक्षकों एवं दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। मुख्य वक्ता नागेंद्र कुमार त्रिपाठी, विशेष शिक्षक, विमला इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ने कहा कि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समावेशी शिक्षा आज समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में अपनी अनूठी क्षमताएं होती हैं और सही मार्गदर्शन तथा अनुकूल वातावरण मिलने पर वे समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। कार्यशाला में शिक्षण के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और बाधाओं पर चर्चा करते हुए उनके समाधान भी साझा किए गए।
वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि दिव्यांगजनों को दया या केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि समान अवसर और उनके अधिकारों की आवश्यकता है। साथ ही बच्चों के शुरुआती विकास और घर के वातावरण को समावेशी बनाने में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
कार्यशाला में स्कूलों में दिव्यांग-अनुकूल बुनियादी ढांचे तथा विशेष शिक्षण सामग्री (टीएलएम) की कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा करते हुए इनके व्यावहारिक समाधान सुझाए गए।

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