नेपाल में कुदरत का कहर: जलप्रलय में तबाही के मुहाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर

विदेश

नई दिल्ली : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश के बुनियादी ढांचे की कमर तोड़ दी है। कुदरत के इस प्रचंड रूप के आगे जलविद्युत परियोजनाओं से लेकर संपर्क मार्ग, बैंकिंग और संचार व्यवस्था तक सब कुछ पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ के भीषण वेग से देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को भारी चोट पहुंची है, जिससे कई इलाके पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं।

बिजली संकट गहराया: 11 हाइड्रोपावर प्लांट तबाह, 431 मेगावाट उत्पादन ठप
बाढ़ का सबसे घातक असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। करीब 11 हाइड्रोपावर प्लांट क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड से 431 मेगावाट बिजली उत्पादन अचानक बाहर हो गया है। बिजली लाइनों और प्लांट के जमींदोज होने से देश में गंभीर बिजली संकट मंडराने लगा है। इसके साथ ही, कई स्थानों पर लगे छह ‘फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ भी तबाही की भेंट चढ़ गए हैं, जिससे भविष्य में आने वाले खतरों की समय पर जानकारी मिलना और मुश्किल हो गया है।

सड़क और पुल बहे, चीन को जोड़ने वाली ऑप्टिकल फाइबर लाइन ठप
यातायात की बात करें तो 40 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। रसुवा से माल्खु के बीच 20 से अधिक मोटरेबल और सस्पेंशन पुल बह गए हैं, जिनमें धादिंगबेसी को जोड़ने वाला मुख्य पुल भी शामिल है। वहीं, संचार व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है; NTC और Ncell के 25 से ज्यादा टावर और साइट्स तबाह हो चुके हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि नेपाल टेलीकॉम की चीन से जुड़ने वाली अंतरराष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर लाइन कट गई है।

वित्तीय संस्थान जलमग्न; जेल की दीवार ढही पर 800 कैदी सुरक्षित

इस प्राकृतिक आपदा ने वित्तीय और प्रशासनिक ढांचे को भी नहीं बख्शा। आधा दर्जन से अधिक बैंक और वित्तीय संस्थानों के दफ्तर पानी के तेज बहाव में बह गए, जबकि दर्जनों अन्य दफ्तर पानी में डूब चुके हैं। नुवाकोट के बिदुर स्थित केंद्रीय जेल और नेपाल पुलिस सुरक्षा इकाई की प्रशासनिक इमारतों की बाहरी दीवारें व वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत की खबर यह है कि जेल की इमारत को नुकसान पहुंचने के बावजूद अंदर बंद सभी 800 कैदी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

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