लखनऊ । उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंगलवार तड़के से प्रदेश के कई हिस्सों में शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सहारनपुर में मात्र 2 घंटे की बारिश से पूरा शहर जलमग्न हो गया, वहीं राज्य के 10 से अधिक शहरों में सुबह से रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की चेतावनी (Alert) जारी की है। सहारनपुर : पॉश इलाकों और प्रशासनिक दफ्तरों में घुसा पानी
सहारनपुर में मंगलवार तड़के 4 बजे से हुई 2 घंटे की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोल दी:
डीएम ऑफिस जलमग्न: जिलाधिकारी (DM) कार्यालय परिसर में घुटनों तक पानी भर गया।
ऑफिसर्स कॉलोनी में जलभराव: शहर की वीआईपी ऑफिसर्स कॉलोनी में पानी घुस गया है, जहाँ जिला जज, कमिश्नर और नगर आयुक्त जैसे शीर्ष अधिकारियों के सरकारी आवास हैं।
सड़कें बनीं तालाब: सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी भर जाने के कारण मुख्य रास्तों से लेकर कॉलोनियों, घरों और दुकानों तक में जलभराव हो गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी: 7 जिलों में ‘अत्यंत भारी’ बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, नोएडा, मेरठ, मुरादाबाद, बिजनौर और शामली समेत 10 शहरों में सुबह से बारिश जारी है।
ऑल-यूपी अलर्ट: राज्य के सभी 75 जिलों में अलर्ट घोषित किया गया है।
चेतावनी: 7 जिलों में बहुत भारी और 53 जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
इससे पहले सोमवार को गोरखपुर और बाराबंकी समेत 25 से अधिक शहरों में भारी बारिश दर्ज की गई थी।
हादसे और तबाही : वृंदावन में पेड़ गिरा, रामपुर में हादसा
वृंदावन : प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के पास 45 साल पुराना विशाल पीपल का पेड़ अचानक गिर गया। पेड़ के नीचे दबकर 2 कारें पूरी तरह चकनाचूर हो गईं।
रामपुर : घर के बाहर खेल रहे दो मासूम बच्चे उफनाते नाले में बह गए। स्थानीय लोगों ने एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि दूसरे बच्चे की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
नदियां उफान पर : फसलें तबाह, पलायन को मजबूर हुए लोग
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से प्रदेश की प्रमुख नदियां—गंगा, यमुना, घाघरा और सरयू उफान पर हैं:
लखीमपुर खीरी : शारदा नदी में तीव्र कटान के कारण लगभग 120 बीघा गन्ने की फसल नदी के तेज बहाव में समा चुकी है।
बलिया : सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी सीधे रिहायशी गांवों में प्रवेश कर गया है। स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीण अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
