उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में शिक्षा के बदलते स्वरूप और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए कहा है कि अब शहर की दूरी बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बाधा नहीं बनेगी। राज्य की 57,600 ग्राम पंचायतों तक डिजिटल लाइब्रेरी की पहुंच बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में ‘ज्ञान का डिजिटल द्वार’ खुल चुका है।
खबर के मुख्य बिंदु:
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76 से 57,600 तक का सफर: सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर पर केवल 76 स्थानों तक सीमित थी। अब यह सुविधा प्रदेश की 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुँच चुकी है।
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गांव में ही हाई-टेक सुविधाएं: ग्राम पंचायत सचिवालयों में बनाई जा रही इन डिजिटल लाइब्रेरियों में कंप्यूटर, प्रिंटर, हाई-स्पीड इंटरनेट, वाई-फाई, स्मार्ट टीवी और सीसीटीवी जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं।
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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: लाइब्रेरियों में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) का साहित्य, ई-बुक्स और डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया गया है। इससे ग्रामीण युवाओं का शहर आने-जाने में लगने वाला समय और पैसा दोनों बच रहा है।
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तकनीक से सशक्त होते युवा:
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प्रदेश में अब तक लगभग 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट बांटे जा चुके हैं।
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32,000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15,000 से ज्यादा स्कूलों में आईसीटी (ICT) लैब की स्थापना की गई है।
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बहराइच का उदाहरण देकर समझाया बदलाव:
सीएम योगी ने सोशल मीडिया (X) पर बहराइच जिले के तेजवापुर ब्लॉक स्थित ‘खसहा मोहम्मदपुर’ गांव की डिजिटल लाइब्रेरी का जिक्र करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत सचिवालय अब सिर्फ प्रशासनिक कामों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे ज्ञान और तकनीक के बड़े केंद्र बन रहे हैं।
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2012 से 2016 के दौरान पर्याप्त बजट होने के बावजूद लाखों बच्चे किताबों और यूनिफॉर्म से वंचित रहे, जबकि आज उत्तर प्रदेश में शिक्षा के संसाधनों की पहुंच हर बच्चे के द्वार तक संभव हो सकी है।
