इस्लामाबाद: पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान के मामले में कानूनी मोर्चे पर एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी है। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस्लामाबाद के चीफ कमिश्नर द्वारा दायर की गई पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका को औपचारिक खामियों का हवाला देते हुए वापस लौटा दिया है। इस फैसले के बाद अब 71 वर्षीय इमरान खान का इलाज अस्पताल में ही कराने का रास्ता साफ नजर आ रहा है।
अधूरी पेपर बुक्स और तकनीकी खामियां बनीं वजह
अदालत की रजिस्ट्री ने पाया कि सरकार की ओर से दाखिल याचिका में जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं थे और पेपर बुक्स अधूरी थीं। एडवोकेट जनरल नवीद हयात मलिक के जरिए दायर की गई इस चुनौती को कोर्ट ने सुनवाई योग्य माने बिना ही वापस कर दिया। अब यदि प्रशासन इस आदेश को चुनौती देना चाहता है, तो उसे पहले सभी तकनीकी आपत्तियों को दूर करके नए सिरे से अर्जी दाखिल करनी होगी।
निजी अस्पताल में भर्ती कराने पर क्या था विवाद?
18 अगस्त को शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने निर्देश दिया था कि इमरान खान को अड्याला जेल से निकालकर इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में शिफ्ट किया जाए, ताकि उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जांच हो सके।
इसके खिलाफ शहबाज सरकार ने दलील दी थी कि:
किसी कैदी को निजी अस्पताल में इलाज की इजाजत देना अन्य बंदियों के साथ भेदभाव होगा।
यह फैसला जेल नियमों की सामान्य प्रक्रिया का उल्लंघन करता है और गलत मिसाल कायम कर सकता है।
हालांकि, अदालत ने सरकार की इन दलीलों को खारिज करते हुए एक विशेष मेडिकल बोर्ड के गठन का निर्देश भी दिया है, जिसमें सरकारी विशेषज्ञों के साथ इमरान खान के निजी चिकित्सक भी शामिल होंगे।
2023 से सलाखों के पीछे हैं इमरान, परिवार ने जताई थी चिंता
अगस्त 2023 से जेल में बंद इमरान खान पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली विपक्षी चेहरों में से एक हैं। बीते कुछ समय से उनके परिवार और पार्टी समर्थकों ने उनकी गिरती सेहत, विशेषकर आंखों से जुड़ी समस्याओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि जेल प्रशासन द्वारा उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी जा रही है।
दूसरी ओर, शहबाज सरकार के कानून मंत्री आजम नजीर तरार का कहना था कि सरकार इलाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को जेल और मेडिकल मैनुअल के अनुसार संचालित करना चाहती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माहौल में शहबाज कैबिनेट की मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं।
