नई दिल्ली : नेपाल के रसुवा जिले में चीन-तिब्बत सीमा से सटी भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। सैलाब इतनी तेजी से आया कि स्थानीय निवासियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तेज बहाव में सड़कें, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। कई लोगों की जान जाने और सैकड़ों के लापता होने की आशंका है।
‘कागज की तरह बह गईं गाड़ियां’: वायरल वीडियोज देख कांपे लोग
सोशल मीडिया पर नेपाल तबाही के खौफनाक वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। छतों और ऊंची पहाड़ियों पर खड़े लोग बेबसी से इस तबाही को देखते नजर आ रहे हैं। पहाड़ों के बीच से उठे कई फीट ऊंचे सैलाब ने गाड़ियों और इमारतों को चंद सेकंड में लील लिया। फुटेज देखकर इंटरनेट यूजर्स लिख रहे हैं—”यह किसी हॉलीवुड मूवी का सीन नहीं, बल्कि कुदरत का खौफनाक कहर है।”
रसुवागढ़ी बॉर्डर पर अलर्ट, भारत तक बढ़ी चिंताएं
तबाही का असर रसुवागढ़ी बॉर्डर और त्रिशूली नदी क्षेत्र तक देखा जा रहा है। डाउनस्ट्रीम इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। सीमावर्ती इलाका होने और तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की मौजूदगी के कारण भारत में भी लोग अपनों की सलामती को लेकर चिंतित हैं। नेपाली सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
पूर्वसूचना प्रणाली पर उठे सवाल: ‘क्या पहाड़ों में कोई अलर्ट सिस्टम नहीं था?’
इस भीषण त्रासदी के बाद सीमा पार से मिलने वाले डिजास्टर अलर्ट और पूर्वसूचना प्रणाली पर बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर नेपाली यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि तिब्बत की तरफ से आ रहे खतरे की समय पर जानकारी क्यों नहीं मिली। हालांकि कुछ जगहों पर माइकिंग की गई थी, लेकिन अचानक आई बाढ़ की भयावहता के आगे सब बेअसर साबित हुआ।
