नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है। ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ तौर पर कहा कि ईरान न तो किसी के सामने सिर झुकाएगा और न ही पीछे हटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस युद्ध की शुरुआत ईरान ने नहीं की थी, बल्कि देश बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, विरोधियों की ओर से लगातार तनाव बढ़ाया गया, जिससे हालात युद्ध में बदल गए।भौगोलिक संदर्भ
पेजेशकियान ने दावा किया कि विरोधियों ने सीरिया की तर्ज पर महज 48 घंटों के भीतर ईरान पर कब्जा करने की पूरी रणनीति बनाई थी। उनका मकसद भारी सैन्य और आर्थिक दबाव बनाकर ईरान को अंदर से कमजोर करना और बिखेरना था। लेकिन ईरान ने अपनी शक्ति और राष्ट्रीय एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए दुश्मनों की इस योजना को पूरी तरह नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि आज तमाम चुनौतियों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद ईरान एक मजबूत और स्थिर राष्ट्र के रूप में खड़ा है।
साक्षात्कार के दौरान पेजेशकियान ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी को देश की सबसे बड़ी ताकत करार दिया, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से उनसे सीधे संवाद करना काफी कठिन है। गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई ने यह जिम्मेदारी संभाली है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहा यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। ट्रंप ने अमेरिकी सेना को हथियारों की आपूर्ति में आ रही कुछ व्यावहारिक दिक्कतों का भी जिक्र किया था। हालांकि, पेजेशकियान के ताजा बयानों से साफ है कि ईरान किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव में झुकने को तैयार नहीं है और सभी मुस्लिम देशों से एकजुट होकर बाहरी साजिशों का सामना करने की अपील कर रहा है।
