काठमांडू/बीजिंग: 26 अगस्त को नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के बाद अब जानकारी के प्रसार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां नेपाल में तबाही के खौफनाक मंजर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खुलकर सामने आ रहे हैं, वहीं तिब्बत की ओर से आ रहे जमीनी फुटेज को चीन सरकार द्वारा सेंसर किए जाने के आरोप लग रहे हैं।पर्यटन स्थल खोजना
ग्यिरोंग में भीषण तबाही और गायब होते वीडियो
नेपाल और चीन के बीच एक प्रमुख व्यापारिक और सीमा मार्ग ‘ग्यिरोंग’ (Gyirong) में बाढ़ और भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने पहाड़ों से मलबे और पानी के तेज बहाव के शुरुआती वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे, लेकिन कुछ ही समय बाद वे पोस्ट्स गायब हो गईं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चीन में जमीनी हकीकत दिखाने वाली स्वतंत्र जानकारियों को हटाकर केवल सरकारी मीडिया (शिन्हुआ और पीपुल्स डेली) के माध्यम से राहत और बचाव कार्यों की प्रायोजित तस्वीरें पेश की जा रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ग्यिरोंग में 558 लोग लापता बताए गए थे, जबकि मौतों का आंकड़ा संदिग्ध रूप से बहुत कम दर्शाया गया है।
नेपाल में मौतों का आंकड़ा 600 के पार, भारतीय भी प्रभावित
दूसरी ओर, नेपाल में हालात बेहद दुखद हैं। फ्लैश फ्लड के कारण सड़कें, पुल और बस्तियां जलमग्न हो चुकी हैं। रॉयटर्स के अनुसार, इस आपदा में अब तक 675 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से अधिक लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में 275 से ज्यादा भारतीय भी लापता बताए जा रहे हैं, जबकि सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
क्या चीन के बांध टूटने से आई बाढ़?
बाढ़ के कारणों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चीनी दूतावास ने उन अटकलों को खारिज किया है कि बाढ़ किसी चीनी बांध के टूटने से आई। चीनी राजदूत झांग माओमिंग ने दावा किया कि यह प्राकृतिक आपदा नेपाल की तरफ हुए हिमस्खलन और भूकंप के बाद बर्फ के बड़े टुकड़े टूटने से शुरू हुई थी।
हालांकि, बाढ़ के कारण जो भी रहे हों, लेकिन तिब्बत से आ रही जानकारियों को दबाने की चीनी नीति ने एक बार फिर संकट के समय पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
