लखनऊ: 31 अगस्त 2026 उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों, उद्यमियों एवं युवाओं के लिए अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। यह सेक्टर न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बनेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।उप मुख्यमंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उपलब्ध सुविधाओं, अनुदानों एवं प्रोत्साहनों के संबंध में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक उद्यमी इस क्षेत्र में निवेश के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों के उत्पादों को बेहतर मूल्य दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग श्री बी एल मीणा की अध्यक्षता में सोमवार को खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय में उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत गठित अप्रेजल समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पोर्टल पर प्राप्त नवीन निवेश प्रस्तावों का परीक्षण एवं एप्रेजल समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार किया गया।
बैठक में अब तक प्राप्त कुल 12 नवीन आवेदनों पर विचार किया गया। इनमें से 10 प्रस्तावों को आवश्यक शर्तों की पूर्ति के अधीन स्वीकृति हेतु संस्तुति प्रदान की गई।संस्तुत परियोजनाओं में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं, जिनमें कैटल फीड, अनाज एवं रिफाइंड मसाले, मूंगफली प्रसंस्करण, फ्रोजन एवं अन्य खाद्य उत्पाद, रेडी-टू-कुक उत्पाद, तेल-आटा-दाल-बेसन निर्माण, दाल मिल तथा फ्रोजन फ्रूट्स एवं वेजिटेबल प्रोसेसिंग जैसी इकाइयां शामिल हैं। कई प्रस्तावों में इकाइयों की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने के लिए सोलर पावर प्लांट की स्थापना भी प्रस्तावित है।एप्रेजल समिति द्वारा संस्तुत परियोजनाओं में स्थानीय किसानों से कच्चे माल की खरीद, आवश्यक प्लांट मैप/फायर एवं प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र, उत्पादन क्षमता के उपयोग तथा विद्युत बिल एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों को प्रस्तुत करने जैसी शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।बैठक में एक प्रस्ताव को अभिलेखों के आधार पर पात्रता न होने के कारण निरस्त किया गया। वहीं, एक अन्य प्रस्ताव में प्लांट एवं मशीनरी से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध कराए जाने के उपरांत आगामी एप्रेजल समिति में विचार किए जाने का निर्णय लिया गया।समिति ने यह भी निर्देशित किया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 के अंतर्गत प्रथम किस्त प्राप्त करने वाली संस्थाओं/इकाइयों को द्वितीय किस्त निर्गत/अवमुक्त करने पर तभी विचार किया जाए, जब संबंधित इकाइयां आरओएफसी के माध्यम से अपने उत्पाद का परीक्षण कराकर परीक्षण आख्या उपलब्ध कराएं।बैठक का उद्देश्य प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नवीन निवेश को प्रोत्साहित करना, स्थानीय कृषि उपज का मूल्य संवर्धन बढ़ाना, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नीति–2023 के अंतर्गत प्राप्त निवेश प्रस्तावों के समयबद्ध परीक्षण एवं आवश्यक अनुमोदन की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
