नई दिल्ली: फार्मास्यूटिकल (दवा) कंपनियों द्वारा दवाओं की बिक्री बढ़ाने और महंगी ब्रांडेड दवाएं लिखवाने के उद्देश्य से डॉक्टरों को महंगे उपहार, प्रायोजित विदेश यात्राएं व अन्य सुविधाएं दिए जाने की प्रथा पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार को एक विशेष समिति गठित करने का आदेश दिया है, जो इस प्रकार की अनैतिक मार्केटिंग प्रथाओं को रोकने के लिए कानूनी व प्रशासनिक ढांचा तैयार करने की सिफारिश करेगी।
आम जनता की जेब और स्वास्थ्य पर असर
सुप्रीम कोर्ट में ‘फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया’ (FMRAI) द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि दवा कंपनियां डॉक्टरों को लुभाने के लिए भारी-भरकम बजट खर्च करती हैं। इसका सीधा असर आम मरीजों की जेब पर पड़ता है, क्योंकि डॉक्टर फिर महंगी दवाएं और अनावश्यक कॉम्बिनेशन ड्रग्स लिख देते हैं, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य का अधिकार भी प्रभावित होता है।
समिति करेगी सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा
अदालत के निर्देशानुसार, केंद्र द्वारा बनाई जाने वाली यह विशेषज्ञ समिति:
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दवा कंपनियों के अनैतिक आचरण पर लगाम लगाने के लिए कठोर कानूनी नियम बनाने पर अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
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इस मुद्दे पर विशेषज्ञों, आम लोगों और संबंधित संस्थाओं द्वारा दी जाने वाली आपत्तियों और सुझावों की समीक्षा करेगी।
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यह तय करेगी कि मौजूदा यूनीफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस (UCPMP) में संशोधन किया जाए या एक नया सख्त वैधानिक कानून लाया जाए।
29 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह समिति के गठन और अब तक हुई प्रगति को लेकर कोर्ट में एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की गई है, जहाँ सरकार को इस संबंध में की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
