संयुक्त राष्ट्र (UN) / नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के संबोधन पर भारत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ (Right of Reply) के तहत तीखा पलटवार किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए उसे “सेना द्वारा, सेना के लिए और सेना की सरकार” करार दिया और कहा कि वहां चुनी हुई सरकारें केवल सेना की कठपुतली मात्र हैं।
‘दिन में सुरक्षा का ढोंग, रात में फैलाते हैं आतंकवाद’
भारत ने पाकिस्तान के पाखंड और दोहरे रवैये की पोल खोलते हुए कहा:
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सेना की कठपुतली: “जो सरकार अपने ही देश के नागरिकों से घबराकर राजधानी को छावनी में तब्दील कर रही है, वह दुनिया को मानवाधिकारों का पाठ पढ़ा रही है। कठपुतली नेता आते-जाते रहते हैं, लेकिन असली सत्ता किसके हाथ में है, यह किसी से छिपा नहीं है।”
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आतंकवाद का केंद्र: भारत ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी का जिक्र करते हुए दुनिया को याद दिलाया कि कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सैन्य अकादमी के ठीक बगल में पनाह लिए बैठा था। भारत ने कहा— “ये लोग दिन में सुरक्षा की बात करते हैं और रात में आतंकवाद फैलाते हैं।”
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अल्पसंख्यकों की बदहाली: धार्मिक असहिष्णुता पर पाकिस्तान के बयानों को खारिज करते हुए भारत ने कहा कि सख्त ईशनिंदा (Blasphemy) कानूनों वाले देश में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न जगजाहिर है।
जम्मू-कश्मीर और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर कड़ा रुख
पाकिस्तान द्वारा फिर से कश्मीर मुद्दा उठाने और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की बात करने पर भारत ने दोटूक जवाब दिया:
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अखंड हिस्सा: जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और हमेशा रहेगा। चर्चा सिर्फ पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले ‘पीओके’ (PoJK) पर होनी चाहिए, जहां नागरिक अत्याचार और अधिकारों के हनन से जूझ रहे हैं।
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आतंकवाद का माकूल जवाब: भारत ने चेतावनी दी कि सीमा पार आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पिछले साल चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए भारत ने कहा कि आतंकवादियों के लिए छिपने की कोई जगह नहीं बचेगी और पाकिस्तान को अपने फैलाए आतंकवाद के गंभीर नतीजे भुगतने होंगे।
भारत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि बार-बार झूठ दोहराने से वह सच नहीं बन जाता और दुनिया अब पाकिस्तान के धोखे व पाखंड को भली-भांति पहचान चुकी है।
