नई दिल्ली: यदि आपने लोन पर कोई गाड़ी खरीदी है और किसी वजह से EMI जमा नहीं कर पा रहे हैं, तो बैंक या फाइनेंस कंपनियां अब आपसे जोर-जबरदस्ती या गुंडागर्दी नहीं कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसले में साफ कर दिया है कि लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में भी फाइनेंसरों को बलपूर्वक या रातों-रात गाड़ी जब्त करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला उत्तर प्रदेश के एक ट्रक मालिक से जुड़ा है, जिसने चोलमंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी से कमर्शियल ट्रक खरीदा था। किस्तें बकाया होने पर आरोप था कि 9 अप्रैल 2023 की रात बिना किसी पूर्व सूचना के चार लोग आए और खड़े ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़कर उसे ले गए। पीड़ित ग्राहक का कहना था कि बिना किसी कानूनी नोटिस और उचित प्रक्रिया के उसके वाहन को जब्त कर लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने स्पष्ट किया कि लोन एग्रीमेंट के तहत फाइनेंसर को वाहन रीपजेशन (वापस लेने) का अधिकार जरूर है, लेकिन इसके लिए कानून को ताक पर नहीं रखा जा सकता।
अदालत ने कहा:
ताला तोड़ना, गुपचुप तरीके से गाड़ी उठाना या बल प्रयोग करना पूरी तरह गलत है।
ग्राहक के अधिकारों का हनन करने पर सुप्रीम कोर्ट ने फाइनेंस कंपनी को मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
फाइनेंसरों के लिए तय किए गए नए नियम:
लिखित नोटिस अनिवार्य: वाहन जब्त करने से पहले ग्राहक को तय समय (कम से कम 7 दिन) का लिखित नोटिस देना जरूरी है।
कानूनी रास्ते का पालन: जबरन गाड़ी उठाने के बजाय बैंकों को रिकवरी के वैध और कानूनी रास्ते अपनाने होंगे।
RBI को निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया है कि वह रिकवरी एजेंटों द्वारा ग्राहकों के उत्पीड़न और अनुचित तरीकों पर रोक लगाने वाले नियमों का सख्ती से पालन कराए।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ है कि डिफॉल्ट होने पर बैंक अपनी रिकवरी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें गुंडागर्दी करने या किसी का आजीविका का साधन जबरन छीनने का हक नहीं है।
