नई दिल्ली : इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों पर खुलकर बयान दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि वो और ट्रंप हमेशा एक-दूसरे की बात नहीं मानते क्योंकि दोनों आजाद देशों के नेता हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच 18 घंटे लंबी बातचीत हुई है। ईरान ने तेल बेचने की परमिट और फ्रीज एसेट्स वापस मांगने की शर्त रखी है।
‘हम गर्व करने वाले देशों के नेता हैं’: नेतन्याहू ने माने मतभेद
इंटरनेशनल पॉलिसी सब्मिटी में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप वो सब कुछ नहीं करते जो मैं चाहता हूं और न ही मैं वो सब कुछ करता हूं जो वो चाहते हैं। हम आजाद और गर्व करने वाले देशों के नेता हैं, कभी-कभी हमारी राय एक-दूसरे से अलग होती है।” हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि ये बातें किस संदर्भ में कही हैं।
इजरायल फिलहाल हमास, हिज्बुल्लाह और ईरान समर्थित समूहों से सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका इजरायल का समर्थन करता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन हर मांग तुरंत स्वीकार नहीं करता।
US-ईरान के बीच 18 घंटे बातचीत: कतर-पाकिस्तान बने मध्यस्थ
ईरान की न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 18 घंटे तक बातचीत चली। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अब टेक्निकल टीमें काम करेंगी। नेगोशिएटिंग डेलिगेशन का काम फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन बातचीत का चरण अभी बाकी है।
इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अब दोनों मध्यस्थ एक लिखित दस्तावेज जारी करेंगे जिसमें 18 घंटे की बातचीत में बनी सहमति की रूपरेखा होगी।
ईरान की दो बड़ी शर्तें: तेल परमिट और फ्रीज फंड वापस दो
ईरानी प्रवक्ता ने बताया कि दस्तावेज से अलग तीन मुद्दे हैं, जिनमें दो बेहद अहम हैं। पहला- ईरान को तेल बेचने के लिए परमिट मिले। ईरान चाहता है कि तेल बिक्री पर पाबंदियां हटें। दूसरा- ईरान के अरबों डॉलर के फ्रोजन एसेट्स वापस मिलें। ये पैसा अमेरिकी पाबंदियों की वजह से ईरान इस्तेमाल नहीं कर पा रहा। प्रवक्ता ने कहा कि इन दो मुद्दों का हल निकलना जरूरी है।
