नई दिल्ली/नोएडा : लोकप्रिय यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी कानूनी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में दर्ज उस FIR को रद्द कर दिया है, जिसमें उन पर सांप के जहर के कथित इस्तेमाल और अवैध गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए थे. यह मामला नोएडा में दर्ज हुआ था और यूपी पुलिस इसकी जांच कर रही थी.
दरअसल, साल 2023 में नोएडा में एक रेव पार्टी से जुड़े कथित मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. आरोप था कि पार्टियों में सांप के जहर का इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जा रहा है. इस मामले में कुछ सपेरों और अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी, जिनके जरिए यूट्यूबर एल्विश यादव का नाम सामने आया. एफआईआर में वन्यजीव संरक्षण कानून और नशीले पदार्थों से जुड़े प्रावधानों के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई थीं. मामला सामने आने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की FIR?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एल्विश यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं हैं. अदालत ने यह भी माना कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में प्रक्रिया और तथ्यों को लेकर गंभीर कमियां हैं.
इस केस में नोएडा पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में यूट्यूबर एल्विश यादव को गिरफ्तार किया था. नोएडा के थाना सेक्टर-49 में पीपुल्स फॉर एनिमल संस्था के पदाधिकारी गौरव गुप्ता ने एल्विश यादव और उसके साथियों पर सांपों के जहर का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था. इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. सांप और उसके जहर के इस्तेमाल के मामले में नोएडा पुलिस की तरफ से चार्जशीट जिला न्यायालय में दाखिल की गई थी. 1,200 पन्नों के आरोप पत्र में नोएडा पुलिस की तरफ से बताया गया कि एल्विश का जेल भेजे गए सपेरों से संपर्क था. एल्विश यादव को पूछताछ के लिए कई बार ईडी ने राजधानी लखनऊ बुलाया था.
