टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने AGM से पहले दिया इस्तीफा,कहा-पिछले एक दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान

बाजार बुलेटिन

नई दिल्ली। टाटा ग्रुप के साथ चार दशक पूरे कर चुके एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को समूह के प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल को एक बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी बताया। टाटा संस के चेयरमैन के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा और उन्होंने कंपनी के बोर्ड को सूचित कर दिया है कि वह इसके बाद चेयरमैन पद के लिए अपना नाम नहीं देंगे। यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) से पहले सामने आया है। चंद्रशेखरन ने टाटा समूह में अपने 40 वर्षों के सफर को याद करते हुए कहा कि इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना और इसके विकास में योगदान देना उनके लिए सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक तक टाटा संस का नेतृत्व करना उनके जीवन की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों और उपलब्धियों में शामिल रहा है। अपने बयान में उन्होंने कहा, “मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे किए हैं। इस प्रतिष्ठित संस्थान के विकास में योगदान देने का अवसर मेरे लिए अत्यंत संतोषजनक रहा है। पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और एक गहरी जिम्मेदारी रही है।”
उन्होंने बताया कि उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। “सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से मेरे अगले कार्यकाल को पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव की सिफारिश टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी की थी। इसके बाद 24 फरवरी 2026 को इस प्रस्ताव को टाटा संस बोर्ड के समक्ष रखा गया था।”
चंद्रशेखरन ने आगे कहा, “हालांकि यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मति का समर्थन नहीं मिलने के कारण मैंने निर्णय को स्थगित करने का विकल्प चुना।”
उन्होंने कहा कि उस बोर्ड बैठक को अब छह महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। “टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और समूह की कई रणनीतिक परियोजनाएं इस समय महत्वपूर्ण चरण में हैं। फरवरी 2027 के बाद समूह का नेतृत्व करने के लिए नए नेता की स्पष्टता होना आवश्यक है। यह केवल संगठन के लिए ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।”
अपने इस्तीफे के फैसले के बारे में उन्होंने कहा, “इन परिस्थितियों में मैंने आज पहले टाटा संस बोर्ड को सूचित कर दिया है कि 20 फरवरी 2027 को मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मैं दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम प्रस्तुत नहीं करूंगा। मैंने बोर्ड से अनुरोध किया है कि वह जल्द से जल्द उत्तराधिकार पर निर्णय ले, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।”
बयान के अंत में उन्होंने सभी हितधारकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं सभी हितधारकों के समर्थन के लिए आभारी हूं। सादर, चंद्रा।”
गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे। वर्ष 2009 में उन्हें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाया गया, जहां उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
पिछले एक वर्ष के दौरान टाटा समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। एयर इंडिया से जुड़े नियामकीय मामलों, टीसीएस पर मूल्य निर्धारण के दबाव और जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर हमले जैसी घटनाओं ने समूह को प्रभावित किया। इसके अलावा टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के दौरान भी दोनों संस्थाएं सुर्खियों में रही थीं।
अब चंद्रशेखरन के इस फैसले के बाद टाटा समूह के अगले नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निवेशकों, कर्मचारियों और उद्योग जगत की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि टाटा संस का अगला चेयरमैन कौन होगा और वह समूह को किस दिशा में आगे ले जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *