‘आउट ऑफ सिलेबस’ टेस्ट से मुंबई में हाहाकार: ऑटो-टैक्सी के पहिये थमे, सड़कों पर भटके यात्री

टॉप न्यूज़ देश

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए लागू किए गए अनिवार्य मराठी भाषा ज्ञान परीक्षण (RTO Test) का मामला अब एक बड़े परिवहन संकट में बदल गया है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की अचानक बढ़ी जांच और सख्ती के विरोध में चालकों के एक बड़े वर्ग ने 3 दिन की हड़ताल का ऐलान कर दिया है।टाइम मैनेजमेंट और कैलेंडर ऐप्स चुनना

दक्षिण मुंबई से लेकर कांदिवली, अंधेरी और मुलुंड जैसे उपनगरों में इस हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। मानसूनी बारिश के बीच सड़कों पर ऑटो और कैब का अकाल पड़ गया है, जिससे दफ्तर और गंतव्य तक पहुँचने के लिए यात्रियों को 40 से 50 मिनट तक बेबस खड़े रहना पड़ रहा है।

‘कमाई छोड़कर परीक्षा दें?’— चालकों का आरोप

हड़ताल पर बैठे चालकों का कहना है कि वे स्थानीय भाषा सीखने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध RTO के जांच के अन्यापूर्ण तरीके को लेकर है। कांदिवली में प्रदर्शन कर रहे ड्राइवर्स का आरोप है कि अधिकारी उनसे ऐसे ‘आउट ऑफ सिलेबस’ और जटिल सवाल पूछ रहे हैं, जो उन्हें दी गई आधिकारिक ट्रेनिंग में शामिल ही नहीं थे।

चालकों का तर्क है कि दैनिक दिहाड़ी पर जीवन चलाने वाले अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे चालकों से रातों-रात भाषाई विशेषज्ञता की उम्मीद करना और काम-धंधा छोड़कर क्लास अटेंड करने को मजबूर करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।

कार्रवाई और सरकारी रुख

परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

8,217 चालकों की जांच: पहले चरण में राज्य भर में बड़े पैमाने पर चेकिंग अभियान चलाया गया।

1,268 चालकों को नोटिस: अकेले मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में 3,995 में से 604 ड्राइवर बुनियादी मराठी नहीं बोल पाए।

सख्त सजा का नियम: नोटिस पाने वाले चालकों को 1 महीने में सुधार दिखाना होगा, वरना उनका बैज 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ किया कि यह नियम 1989 से लागू है। सरकार किसी ड्राइवर को मराठी का साहित्यकार नहीं बनाना चाहती, बल्कि केवल यात्रियों के साथ सहज संवाद योग्य ‘व्यावहारिक ज्ञान’ चाहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *