मुंबई: टाटा ग्रुप के शीर्ष प्रबंधन में जारी खींचतान और बोर्डरूम विवाद और गहरा गया है। टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड को एक ई-मेल भेजकर 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग और आधिकारिक मिनट्स (कार्यवृत्त) की मांग की है। इसी बैठक में एन. चंद्रशेखरन (N. Chandrasekaran) को दोबारा टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था।
प्रक्रिया और वैधता पर उठाए गंभीर सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा ने पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया और उसकी कानूनी वैधता पर सीधा सवाल खड़ा किया है:
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एजेंडे का हिस्सा न होना: नोएल टाटा ने आरोप लगाया कि 17 सितंबर की बैठक में एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का मुद्दा औपचारिक एजेंडे (Agenda) में शामिल ही नहीं था।
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वोटिंग का अधिकार: उन्होंने तर्क दिया कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स के मनोनीत निदेशकों (Nominee Directors) के विशिष्ट वोटों के बिना ऐसा फैसला नहीं लिया जा सकता।
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कास्टिंग वोट का इस्तेमाल: नोएल टाटा ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाई. चंद्रचूड़ की कानूनी राय का हवाला देते हुए कहा कि चेयरमैन अपने ‘कास्टिंग वोट’ का इस्तेमाल करके ट्रस्ट्स के निदेशकों के अधिकारों को खारिज नहीं कर सकते।
टाटा ट्रस्ट्स ने प्रस्ताव को बताया था ‘अवैध’
उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर की बैठक के बाद ही टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बयान जारी कर चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को गैर-कानूनी (Legal Nullity) करार दिया गया था।
टाटा संस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत सूचीबद्ध (Listing) होने का दबाव भी है, जिसके बीच टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व और ट्रस्ट के बीच जारी यह शक्ति-संतुलन की जंग और अधिक तेज हो गई है।
