नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) का इस्तेमाल करने वाले मर्चेंट्स और प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा कमर्शियल और बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू करने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
क्या है यह फैसला और किस पर पड़ेगा असर?
आम यूज़र्स के लिए पूरी तरह मुफ्त: इस नए नियम का असर आम जनता (पर्सन-टू-पर्सन या सामान्य छोटे दुकानदारों को पेमेंट करने वाले यूज़र्स) पर नहीं पड़ेगा। ग्राहकों के लिए यूपीआई पेमेंट पहले की तरह ही बिल्कुल मुफ्त रहेगा।
चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क: यह नियम विशिष्ट श्रेणी के बड़े व्यापारियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और हाई-वैल्यू कमर्शियल ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।
MDR रेट: निर्धारित सीमा से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स पर एक तय प्रतिशत (MDR) शुल्क के रूप में लिया जाएगा, जिसे पेमेंट स्वीकार करने वाला मर्चेंट या बैंक वहन करेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती: यूपीआई नेटवर्क को संचालित करने वाले बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (PSPs) और फिनटेक कंपनियों के बढ़ते मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को संभालने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाना: सरकार और NPCI का मानना है कि बड़े कमर्शियल स्तर पर हल्का शुल्क लगाने से डिजिटल पेमेंट्स इकोसिस्टम को लंबे समय तक वित्तीय रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने में मदद मिलेगी।
