भारतीय एजेंसियां अल-कायदा से जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर रख रहीं पूरी नजर

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नई दिल्ली । अल-कायदा से जुड़े संगठन अंसार अल-इस्लाम (एएआई) के दोबारा सक्रिय होने की आशंकाओं के बीच भारतीय खुफिया एजेंसियां उन पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। यह संगठन 2021 में इराक में स्थापित हुआ था और शुरू में इसने धर्मनिरपेक्ष कुर्द गुटों और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इस संगठन का इराकी ढांचा काफी हद तक बिखर चुका है, लेकिन इसका बांग्लादेश स्थित विंग अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) फिर से सक्रिय होने के संकेत दे रहा है। एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी ने बताया कि फिलहाल एबीटी जमीनी स्तर पर बहुत सक्रिय नहीं है, और यह एक रणनीति के तहत जानबूझकर “लो-प्रोफाइल” बना हुआ है ताकि उस पर ध्यान कम जाए। हालांकि, संगठन की ऑनलाइन गतिविधियां काफी तेज हैं और वह भारतीयों को निशाने पर रख रिक्रूटमेंट की कोशिश कर रहा है।
अधिकारी के अनुसार एबीटी अपने पाकिस्तानी समकक्ष एएआई पाकिस्तान के साथ भी करीबी तालमेल में काम कर रहा है। दोनों संगठन मिलकर भर्ती गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें मुख्य फोकस भारत पर है। इन दोनों संगठनों का इतिहास हिंसक और कट्टरपंथी गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एएआई पाकिस्तान की तुलना में एबीटी ज्यादा खतरनाक है। बांग्लादेश में कड़े दमन के बाद एबीटी की जमीन पर गतिविधियां काफी सीमित हो गई हैं, इसलिए यह अब ऑनलाइन गतिविधियों के जरिए सक्रिय है। भारत में इसकी भर्ती रणनीति इसी दिशा पर केंद्रित है।
अधिकारियों का कहना है कि एबीटी भारत में वही मॉडल दोहराना चाहता है जो उसने बांग्लादेश में अपनाया था। इसका उद्देश्य भारत में ऐसे लोगों का नेटवर्क तैयार करना है जो कथित तौर पर “इस्लाम-विरोधी” लोगों- जैसे धर्मनिरपेक्ष लेखकों, बुद्धिजीवियों और बाद में राजनीतिक वर्ग को निशाना बना सकें।
सूत्रों के मुताबिक, एबीटी का भारत में उद्देश्य पारंपरिक आतंकी मॉड्यूल बनाकर विस्फोट या बड़े हमले करना नहीं है, बल्कि ऐसे व्यक्तियों को कट्टरपंथी बनाना और भर्ती करना है जो स्वतंत्र रूप से टारगेट किलिंग को अंजाम दे सकें। ये लोग किसी संगठित समूह के बजाय अकेले काम करने को तवज्जो दे रहे हैं।
एबीटी अभी भी अल-कायदा के प्रति निष्ठा रखता है और भर्ती अभियानों में अल-कायदा की विचारधारा और ओसामा बिन लादेन की लिखी बातों को अपनाने में यकीन रखता है।
इसके अलावा, यह संगठन भारत में बड़े पैमाने पर दुष्प्रचार अभियान चलाने की भी योजना बना रहा है, जिसका फोकस मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल पर होगा। यह फर्जी तस्वीरें और झूठी कहानियां फैलाकर घुसपैठ जैसे मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने और हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि एबीटी अभी भारत में पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाया है और स्थिति को “टेस्टिंग द वॉटर” (स्थिति को भांपने की कोशिश) के तौर पर देख रहा है। खुफिया एजेंसियां इसकी ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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