भारत ने अपनी आतंकवाद विरोधी रणनीति (Counter-Terror Strategy) में एक नया और बड़ा बदलाव किया है। देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां अब आतंकी हमलों के बाद कार्रवाई करने की जगह, हमले की योजना बनने के चरण में ही साजिशों का पता लगाकर उन्हें नाकाम करने (Preventive Strategy) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
पूर्व-रोकथाम (Preventive Action) पर जोर: सुरक्षा एजेंसियों का नया रुख यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आतंकी साजिश को हमले के अंजाम तक पहुंचने से पहले ही ट्रेस करके शुरुआती स्तर पर ही खत्म कर दिया जाए।
खुफिया नेटवर्क का विस्तार: खुफिया तंत्र (Intelligence Network), डिजिटल निगरानी और राज्यों की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि रियल-टाइम डेटा का विश्लेषण करके खतरों को पहले ही पहचाना जा सके।
साइबर और डिजिटल थ्रेट्स पर नजर: आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया, डार्क वेब और डिजिटल फाइनेंसिंग (फंडिंग) के नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
लोन-वुल्फ और स्लीपर सेल्स पर नकेल: नया रणनीति मॉडल केवल संगठित आतंकी समूहों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘लोन-वुल्फ’ (अकेले हमला करने वाले) हमलों और अंडरग्राउंड स्लीपर सेल्स की गतिविधियों को भी नाकाम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता: देश की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बनाने और निर्दोष नागरिकों की जानमाल की रक्षा के लिए इस सक्रिय और आक्रामक रणनीति को लागू किया गया है।
