उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद राजनीति में उतरने की आधिकारिक घोषणा की है। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पारंपरिक राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय आम लोगों की आवाज बनने के लिए स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगी।
मुख्य बातें और संदेश के प्रमुख बिंदु:
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राजनीति में आने की वजह: दिव्या मित्तल ने कहा कि वे उन आम लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी फरियाद सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या सुनी नहीं जाती। वे आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगने आई हैं।
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इरादे पर उठाए सवाल: मिर्जापुर के एक गांव में स्कूल की मंजूरी के बावजूद 3 साल तक काम शुरू न होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा— “अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता, और इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई।”
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सिस्टम और अफसरशाही पर प्रहार: राजस्व विभाग के अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब गरीब को उसके हक की जमीन नहीं मिलती और कहा जाता है कि ‘ऊपर से मना है’, तो आखिर यह ‘ऊपर’ कौन है? संविधान में जनता ही सर्वोच्च है।
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जनता से जुड़ने की पहल: उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के बजाय उत्तर प्रदेश से अपनी अलग राह बनाने की बात कही और लोगों से सीधे जुड़ने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर (9198956957) भी साझा किया है।
