नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध और ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय उपभोक्ताओं की खर्च करने की आदत बदल रही है। कांतार की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लोग अब शौक पर पैसे उड़ाने के बजाय बचत बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खर्च नहीं, बचत पर जोर
मई 2026 में 21-55 साल के 1,684 लोगों पर हुए सर्वे में सामने आया कि उपभोक्ता अब सेलेक्टिव खर्च कर रहे हैं। सिर्फ वही चीजें खरीद रहे हैं जो लंबे समय तक वैल्यू दें। 63% लोगों ने कहा कि वे परिवार के भविष्य के लिए ज्यादा बचत की योजना बना रहे हैं।
नौकरी-महंगाई का डर बढ़ा
जनवरी 2026 में 60% लोग अर्थव्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद कर रहे थे, अब सिर्फ 48% को भरोसा है। नौकरी जाने की चिंता 36% से बढ़कर 41% हो गई है। 61% लोगों को लगता है कि उनकी बचत-निवेश स्थिर रहेंगे या घट जाएंगे, सिर्फ 39% को बढ़ोतरी की उम्मीद है।
कहां घटा खर्च
बाहर खाना, मनोरंजन, शॉपिंग और सब्सक्रिप्शन पर खर्च घटा है। बड़े खर्च की योजना वाले उपभोक्ता 46% से घटकर 44% रह गए। 65% लोगों ने खर्च घटाने की वजह महंगाई बताई।
सबसे बड़ी चिंता
85% लोगों ने हेल्थ पर होने वाले खर्च को सबसे बड़ा वित्तीय जोखिम माना। 80% को जीवनयापन की बढ़ती लागत और 71% को किराया-EMI की चिंता है।
यात्रा से समझौता नहीं
रोजमर्रा के खर्च में कटौती के बावजूद लोग यात्रा और अर्थपूर्ण अनुभवों से समझौता नहीं कर रहे। भावनात्मक संतुष्टि, व्यक्तिगत विकास और तनाव से राहत देने वाले अनुभव प्राथमिकता में हैं। लोगों को डर है कि ईरान संकट से महंगाई और बढ़ सकती है।
