काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के हफ़्तों बाद भी तबाही का खौफनाक मंजर कायम है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1,399 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5,179 लोग अभी भी लापता हैं। समय बीतने के साथ ही मलबे में दबे लोगों के जीवित बचने की उम्मीदें बेहद धूमिल होती जा रही हैं।
सुरंगों में फंसी सांसें: भारत-नेपाल की संयुक्त टीम तैनात
बाढ़ और भूस्खलन का सबसे घातक असर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर पड़ा है:
कुल 13 प्रभावित परियोजनाओं में से 11 प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे 868 कर्मचारियों से संपर्क टूट चुका है।
चिलिमे, अपर त्रिशूली-1 और अपर त्रिशूली-3 ‘बी’ की सुरंगों में सघन खोज अभियान जारी है।
भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और नेपाली सुरक्षा बलों की संयुक्त टुकड़ी चिलिमे सुरंग (130 मीटर गहराई) और अपर त्रिशूली-1 (लगभग 600 मीटर गहराई) से मलबा हटाकर रास्ता बनाने में जुटी हुई है।
21 हजार जवानों का महाअभियान और तकनीक का सहारा
राहत और बचाव कार्य के लिए नेपाली सेना (8,900), सशस्त्र पुलिस (5,000) और नेपाल पुलिस (8,000) के 21,000 से अधिक जवान दिन-रात तैनात हैं।
संचार और मार्ग ठप: रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से पुलिस स्टेशन तक बह गए हैं। स्याफ्रुबेसी और चीन सीमा से लगे टिमुरे बाजार में सड़कें और पुल पूरी तरह ध्वस्त हैं। अकेले टिमुरे क्षेत्र से 100 से अधिक शव बरामद किए गए हैं।
ड्रोन बने जीवन रक्षक: दुर्गम इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाने और शवों को बाहर निकालने के लिए भारी मात्रा में ड्रोन की मदद ली जा रही है। रसुवा में 5,861 किलो और नुवाकोट में 16,138 किलो राशन व जरूरी सामान ड्रोन के जरिए प्रभावितों तक पहुंचाया गया है।
