नई दिल्ली / कानपुर: भारतीय सर्राफा बाजार और वायदा बाजार (MCX) में लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में उच्चतम स्तर को छूने के बाद निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण सोने के दाम में करीब Rs.2,000 की नरमी देखने को मिली है। वैश्विक बाजार में सुस्ती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की कम होती संभावनाओं का सीधा असर कीमती धातुओं की चाल पर पड़ा है।भौगोलिक संदर्भ
MCX और इंटरनेशनल मार्केट का हाल
MCX पर सोना: शुक्रवार को वायदा बाजार में सोना Rs.1,184 की गिरावट के साथ Rs.1,52,282 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा।
MCX पर चांदी: चांदी में भी बड़ी गिरावट आई और यह Rs.2,426 टूटकर Rs.2,33,021 प्रति किलोग्राम पर आ गई।
ग्लोबल मार्केट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव साफ दिखा। सोना 0.92% की गिरावट के साथ $4,379 प्रति औंस और चांदी 1.34% फिसलकर $64.125 प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।
विशेषज्ञों का नजरिया: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में सोने के लिए Rs.1,52,000 से Rs.1,52,500 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है।
मेट्रो और प्रमुख शहरों में आज का भाव (GST और मेकिंग चार्ज के साथ)
कीमती धातुओं के खुदरा बाजार में आज की दरें इस प्रकार हैं:
दिल्ली (Delhi)
22 कैरेट सोना (मूल भाव): Rs.14,030 प्रति ग्राम (10 ग्राम = Rs.1,40,300)
अंतिम कुल कीमत: 12% मेकिंग चार्ज (Rs.16,836) और 3% GST (Rs.4,714) जोड़ने के बाद दिल्ली में 10 ग्राम 22K सोने का फाइनल रेट Rs.1,61,850 पड़ेगा।
कानपुर (Kanpur)
24 कैरेट सोना: Rs.71 गिरकर Rs.15,304 प्रति ग्राम।
22 कैरेट सोना: Rs.65 गिरकर Rs.14,030 प्रति ग्राम (10 ग्राम कुल बिल GST+मेकिंग चार्ज मिलाकर: ₹1,61,850)।
18 कैरेट सोना: Rs.11,482 प्रति ग्राम।
पटना (Patna)
22 कैरेट सोना: Rs.14,020 प्रति ग्राम (10 ग्राम = Rs.1,40,200 मूल भाव)।
4. चांदी की कीमत (Delhi, Kanpur व अन्य शहर)
प्रति ग्राम दर: Rs.255
प्रति किलोग्राम दर: Rs.2,55,000 प्रति किग्रा।
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े: जुलाई में अमेरिका में खुदरा महंगाई दर सीमित रहने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अगले महीने ब्याज दरें बढ़ाने की गुंजाइश काफी कम हो गई है।
डॉलर और कच्चे तेल का दबाव: अमेरिकी डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव का असर भी बुलियन मार्केट पर पड़ा है।
हाई लेवल पर प्रॉफिट बुकिंग: बीते दिनों 5 जून के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने प्रॉफिट को कैश कराना शुरू कर दिया, जिससे कीमतें नीचे आ गईं।
