नई दिल्ली । दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के युवाओं से डरी हुई है और इसीलिए उनकी आवाज दबाने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक ने एक वीडियो ब्लॉग में सरकार को सलाह भी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा कि वे देश के युवाओं की आवाज दबाने के बजाय रचनात्मक और उल्लेखनीय कामों पर ध्यान दें। केजरीवाल ने दावा किया कि केंद्र सरकार एक नया कानून लाई है, जिसके तहत सरकार के कामकाज की आलोचना या असहमति जताने वाली किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो को सरकार के कहने पर हटा दिया जाएगा।
उन्होंने वीडियो में दावा किया, “केंद्र सरकार एक नया कानून लाई है। अगर सरकार किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कोई पोस्ट, लेख या वीडियो हटाने के लिए कहती है, तो उन्हें इसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। इसका मतलब है कि अगर आप पेपर लीक, इथेनॉल ब्लेंडिंग और सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो आपकी पोस्ट कुछ ही घंटों में हटा दी जाएगी।”
केजरीवाल ने कहा, “सत्ता में बैठे लोगों को लगता है कि उन्हें युवा छात्रों के साथ बुरा बर्ताव करने, उनका अपमान करने और उन्हें परेशान करने का हक है और इसके लिए उनसे कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। यह देश के युवाओं की आवाज को दबाने और उन्हें चुप कराने की एक साफ कोशिश है।”
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुआ विरोध प्रदर्शन लोगों के उस गुस्से का नतीजा है जो पिछले दस साल से जमा हो रहा था।
केजरीवाल ने कहा कि छात्रों के साथ बुरा बर्ताव किया गया, महिलाओं का अपमान किया गया और उन्हें अपना विरोध जताने से रोका गया। यह सही तरीका नहीं है।
प्रधानमंत्री को सीधे सलाह देते हुए केजरीवाल ने कहा, “लोगों को डराने और उनकी आवाज को दबाने के बजाय आपको अच्छे काम करने चाहिए, लोग आपकी तारीफ करने लगेंगे।” उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो युवाओं में गुस्सा और बढ़ता जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी, “आप देश के युवाओं की आवाज को जितना दबाएंगे, उनका गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।”
एक दिन पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने मेटा इंडिया पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कंपनी ने बिना किसी ठोस वजह के उनका अकाउंट रोक दिया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना भी न झुकें। वरना वे आपको भारत में सिर्फ उन्हीं का अकाउंट चलाने देंगे।”
