संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की प्रशासकीय एवं बजटीय मामलों से जुड़ी पांचवीं समिति (Fifth Committee) की बैठक में भारत ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी सदस्य देशों से अपना वित्तीय अंशदान समय पर देने की अपील की है।
भारत ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिरता तभी बनी रह सकती है जब सभी 193 सदस्य देश बिना किसी देरी के अपना तय बकाया भुगतान करें।
भारत के संबोधन के प्रमुख बिंदु
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समय पर भुगतान का रिकॉर्ड: भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रति अपनी वित्तीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि वह हमेशा अपने बजटीय बकाए का समय पर और पूर्ण भुगतान करता आया है। अन्य देशों को भी इस अनुशासन का पालन करना चाहिए।
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विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन: भारत ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र को शांति अभियानों और प्रशासनिक खर्चों के साथ-साथ विकासशील देशों में गरीबी उन्मूलन, सतत विकास (SDGs) और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों के लिए पर्याप्त और नियमित फंड सुनिश्चित करना चाहिए।
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वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता: बैठक के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यूएन के संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और जवाबदेही पर जोर दिया, ताकि उपलब्ध फंड का अधिकतम लाभ वैश्विक स्तर पर जरूरतमंद देशों तक पहुँच सके।
भारत का यह रुख वैश्विक विकास एजेंडे को मजबूती देने और संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संदेश है।
