उत्तर प्रदेश में फिर से सरकार बनाने का सपना देख रही समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस बार चुनाव प्रचार से पहले अपनी अंदरूनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव की सभी 403 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘माइक्रो मैपिंग’ और ‘ट्रिपल-लेयर सर्वे’ का सहारा लिया है। पार्टी का पूरा जोर अब केवल उन चेहरों पर है जो सीधे तौर पर सीट निकालने का माद्दा रखते हैं।
तीन स्तर पर परखा जा रहा हर दावेदार सूत्रों के मुताबिक, सपा ने इस बार टिकट वितरण में किसी भी चूक से बचने के लिए त्रिस्तरीय सर्वे प्रणाली लागू की है।
दो स्वतंत्र एजेंसियां: ग्राउंड लेवल पर जनता का मूड और उम्मीदवार का प्रभाव जांच रही हैं।
युवा मोर्चा व संगठन: बूथ स्तर के सटीक जातीय आंकड़ों और क्षेत्रीय राजनीति की रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
जिला स्तरीय फीडबैक: अखिलेश यादव खुद स्थानीय नेताओं से मिलकर संभावित चेहरों की मजबूती और कमजोरियों का रिव्यू ले रहे हैं।
गलतियों से सबक: रसूख नहीं, जनता का रुझान तय करेगा टिकट वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से उत्साहित और 2022 की खामियों से सीख लेते हुए अखिलेश ने साफ कर दिया है कि पैरवी या रसूख के बल पर किसी को टिकट नहीं मिलेगा। अगर सर्वे रिपोर्ट या स्थानीय फीडबैक में रेटिंग खराब आई, तो बड़े से बड़े नेता का पत्ता कटना तय है।
अधे से ज्यादा सीटों पर बूथवार डेटा जुटाने का काम पूरा कर लिया गया है। जिन उम्मीदवारों को सर्वे में ‘हरी झंडी’ मिल रही है, उन्हें बिना किसी औपचारिक घोषणा के चुपचाप अपने-अपने क्षेत्रों में जमीन मजबूत करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
