प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक प्रेरक संदेश देते हुए जीवन में कृतज्ञता के महत्व को समझाया है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषित (श्लोक) साझा किया है, जिसमें यह बताया गया है कि एक श्रेष्ठ और सच्चा व्यक्ति दूसरों के उपकार और महापुरुषों के बलिदान को कभी नहीं भूलता।
पीएम मोदी द्वारा साझा किया गया सुभाषित और उसका अर्थ:
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श्लोक:“प्रथमवयसि पीतं तोयमल्पं स्मरन्तः शिरसि निहितभारा नारिकेला नराणाम्। ददति जलमनल्पास्वादमाजीवितान्तं न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति॥”
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भावार्थ: इस सुंदर श्लोक का अर्थ है कि जिस प्रकार नारियल का वृक्ष अपने शुरुआती जीवन में दिए गए थोड़े से पानी (जल) के उपकार को कभी नहीं भूलता और अपने सिर पर भारी वजन (नारियल का गुच्छा) उठाते हुए भी जीवनभर इंसानों को मीठा और स्वादिष्ट पानी पिलाता रहता है, उसी प्रकार एक सच्चा और उदात्त व्यक्ति बलिदानी महापुरुषों के त्याग व उपकार को कभी नहीं भूलता। वे उनके समर्पण के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहते हैं और अपने जीवन को उनके आदर्शों के अनुरूप समर्पित रखते हैं।
कृतज्ञता का संदेश: प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित से यह सीख मिलती है कि हमें जीवन में किसी भी व्यक्ति द्वारा किए गए भलाई के कामों और महान त्याग को हमेशा याद रखना चाहिए। कृतज्ञता का यह भाव हमारे मन को कोमल बनाता है और हमें दूसरों के प्रति संवेदनशील रहने की प्रेरणा देता है।
यह प्रसिद्ध सुभाषित संस्कृत के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सुभाषितरत्नभाण्डागारम्’ से लिया गया है, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक, पौराणिक और काव्यात्मक ग्रंथों से हजारों अनमोल वचनों व सुभाषितों को संकलित किया गया है।
