भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ एजेंडे के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर वैश्विक शांति और सुरक्षा में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सशस्त्र बलों में महिलाओं की अधिक भागीदारी से संघर्ष क्षेत्रों में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

इस खबर से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने जोर देकर कहा कि दुनिया भर में संघर्षों के दौरान महिलाओं और लड़कियों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे निपटने के लिए सैन्य और शांति मिशनों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है।

  • संघर्ष क्षेत्रों में सुरक्षा: भारत ने यह बात उठाई कि जिन समुदायों में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, राजनीतिक रूप से प्रतिनिधित्व प्राप्त और सामाजिक रूप से सम्मानित होती हैं, वे संघर्षों से तेजी से उबरते हैं और वहां हिंसा के दोबारा उभरने की आशंका कम होती है।

  • भारत की घरेलू पहल का उदाहरण: संयुक्त राष्ट्र मंच पर भारत ने देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र किया, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण अधिनियम, 2023) का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, जिसके तहत राष्ट्रीय और राज्य की विधमंडलों में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गई हैं।

  • बढ़ते संघर्ष और चिंताएं: वैश्विक स्तर पर संघर्ष से जुड़ी यौन हिंसा के मामलों में आई तेजी पर चिंता जताते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ (WPS) एजेंडे को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की है।

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