नई दिल्ली: अपनी आंतरिक नाकामियों और नापाक हरकतों को छिपाने के लिए भारत पर मनगढ़ंत आरोप लगाना पाकिस्तान की पुरानी फितरत रही है। हाल ही में पाकिस्तान के रणनीतिक हलकों में भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और ब्रह्मोस मिसाइल का खौफ साफ तौर पर देखा गया। लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के एक वैश्विक कार्यक्रम में पाकिस्तान के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और नेशनल कमांड अथॉरिटी के सलाहकार मजर जमील ने भारत के खिलाफ बेतुकी बयानबाजी की है।
लंदन में दिए गए बेबुनियाद बयान
लंदन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मजर जमील ने दावा किया कि भारत तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे उग्रवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की रणनीतियों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाने के लिए आतंकवाद का सहारा ले रहा है। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी उनके पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या तथ्य मौजूद नहीं थे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस का डर
मजर जमील के भाषण में भारत के स्वदेशी हथियारों, विशेषकर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का खौफ खुलकर सामने आया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया कि भारत ने इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया था।
हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारी इस बात को छिपा गए कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की कड़ी कार्रवाई से पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके बाद खुद पाकिस्तान के डीजीएमओ (DGMO) को भारतीय पक्ष से हमले रोकने की गुहार लगानी पड़ी थी। इसके अलावा, उन्होंने मार्च 2022 की दुर्घटनावश चली ब्रह्मोस मिसाइल की घटना का गलत संदर्भ देकर भारत पर जानबूझकर हमला करने का निराधार आरोप भी मढ़ा।
भारत की परमाणु नीति पर उठाए सवाल
पाक सलाहकार ने भारत की प्रसिद्ध ‘नो फर्स्ट यूज’ (No First Use) परमाणु नीति को भी महज एक दिखावा करार दिया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की किताब के अंशों का अपने हिसाब से गलत अर्थ निकालते हुए भारत पर गंभीर सवाल खड़े किए। हालांकि, सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुश्मन के परमाणु ठिकानों को बेअसर करने की सैन्य तैयारियों और ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति में स्पष्ट अंतर होता है, जिसे पाकिस्तान जानबूझकर भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का कहना है कि तथ्यहीन बयानों और बेतुके तर्कों से यह साफ जाहिर होता है कि भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के खौफ ने पाकिस्तानी हुक्मरानों और रणनीतिकारों की नींद उड़ा रखी है।
