मिडिल ईस्ट में फिर महायुद्ध की आहट: अमेरिकी मिडटर्म के बाद ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में US और इजरायल!

विदेश

तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के हालात एक बार फिर बेहद विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के तुरंत बाद ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की गुप्त रूप से योजना तैयार कर ली है। हालांकि इस आक्रामक रणनीति को अभी अंतिम मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन चल रही तैयारियों ने क्षेत्र में एक बड़े युद्ध के खतरे को गहरा कर दिया है।

3 दिनों का ‘शॉर्ट एंड शार्प’ मास्टरप्लान

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ईरान के साथ कोई लंबा युद्ध नहीं चाहते, बल्कि उनका मकसद तीन दिनों के भीतर बेहद तीव्र और सटीक हमले (Short & Sharp Strike) करना है। इस रणनीति के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को कमजोर कर उसे परमाणु मुद्दों पर बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर करने की योजना है।

संभावित हमलों के दायरे में ईरान के गुप्त परमाणु केंद्र, मिसाइल व ड्रोन निर्माण डिपो, ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य कमान केंद्र शामिल हो सकते हैं।

‘मदर ऑफ ऑल बम’ और सामरिक चुनौतियाँ

ईरान के पहाड़ी इलाकों में गहराई में बने सुरक्षित परमाणु ठिकानों (जैसे ‘पिकैक्स माउंटेन’) को निशाना बनाने के लिए 22,000 पाउंड वजनी विनाशकारी बम GBU-43/B (MOAB – Mother of All Bombs) के इस्तेमाल की चर्चा है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन के सामने कुछ बड़ी चिंताएं भी हैं—जैसे तेल रिफाइनरियों पर हमले से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का अचानक आसमान छू जाना और अमेरिकी घरेलू अर्थव्यवस्था पर इसका असर। इसके अलावा, पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध के अनियंत्रित फैलाव और अमेरिकी सेना के पास मिसाइल-इंटरसेप्टर रक्षा प्रणालियों की कमी भी बड़े रोड़े हैं।

इजरायल का शक्ति प्रदर्शन और ईरान की चेतावनी

तनाव के बीच, इजरायल ने अपनी वायुसेना के साथ ईरान की सीमा के पास एक विशाल सैन्य अभ्यास किया है, जिसमें दर्जनों लड़ाकू विमानों और रीफ्यूलिंग टैंकरों ने हिस्सा लिया।

दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ चेतावनी दी है कि यदि कोई हमला हुआ तो उसकी जवाबी कार्रवाई सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहेगी। तेहरान खाड़ी देशों में स्थित तेल संयंत्रों, बड़े डेटा सेंटरों और समुद्र के नीचे बिछे वैश्विक इंटरनेट केबलों को भी निशाना बना सकता है।

फिलहाल, जब तक कूटनीतिक बातचीत के जरिए कोई समाधान नहीं निकलता, मिडिल ईस्ट में महायुद्ध का यह साया लगातार मंडरा रहा है।

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